अमेरिका में राहुल का भाषण था या भागवत का : सिब्बल का आरएसएस प्रमुख पर तंज
अमेरिका में राहुल का भाषण था या भागवत का : सिब्बल का आरएसएस प्रमुख पर तंज
नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में विविधता पर दिए गए बयानों पर रविवार को तंज कसते हुए कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी बोल रहे थे या संघ प्रमुख।
उन्होंने भागवत पर विदेश में अलग रुख अपनाने का भी आरोप लगाया।
वरिष्ठ अधिवक्ता और निर्दलीय राज्यसभा सदस्य सिब्बल ने भागवत पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आप विदेशों में तो विविधता को स्वीकार करते हैं, लेकिन देश में विविधता को बर्दाश्त नहीं करते।’’
सिब्बल ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यही हिंदुत्व की सच्चाई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 2014 से अब तक देश में यही संघर्ष चल रहा है… आप लोगों को ‘जियो और जीने दो’ की अनुमति नहीं दे रहे हैं। मेरा अभिप्राय है, जंतर-मंतर पर इस सरकार ने क्या किया, और क्या आपने आवाज उठाई? नहीं, आपने इस सरकार के खिलाफ कभी एक शब्द भी नहीं कहा।’’
सिब्बल ने भागवत पर यह हमला ऐसे समय किया है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और रेखांकित किया कि इसका जश्न मनाया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया।
उन्होंने यह बात ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ फोरम द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।’’ उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है।
सिब्बल ने भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘मैं सोच रहा था कि यह राहुल गांधी का भाषण था या भागवत जी का। क्योंकि जब उन्होंने इस बारे में बात की कि ‘भारत एक-दूसरे के लिए कैसा महसूस करता है’, तो वे असल में क्या कह रहे थे? ठीक यही बात तो राहुल गांधी हमेशा कहते हैं।’’
उन्होंने आरएसएस प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जब आप न्यूयॉर्क में होते हैं तो आपको एक-दूसरे की फिक्र होती है, लेकिन जब आप दिल्ली में होते हैं तो ऐसा नहीं होता। जब भीड़ हिंसा होती है, तो क्या आपको उन लोगों के लिए बुरा लगता है जिनके साथ ऐसा होता है? क्या आपने कभी भीड़ हिंसा का शिकार हुए लोगों के बारे में कुछ कहा है? क्या आपने कभी इसकी आलोचना की है या यह सवाल उठाया है कि मेरे देश में ऐसा क्यों हो रहा है?’’
सिब्बल ने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि जब वह विदेश में होते हैं तो कहते हैं कि भारत एक-दूसरे के लिए संवेदना रखता है, और फिर ऐसी सरकार का समर्थन करते हैं जो लोगों की परवाह नहीं करती।
भागवत के विविधता का जश्न मनाने संबंधी बयान पर सिब्बल ने उनसे सवाल किया कि क्या वह इस देश में विविधता का जश्न मनाते हैं?
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘वास्तव में, जब राम मंदिर का उद्घाटन हुआ और भगवान राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तो आपने क्या कहा? आपने ऐसा क्या कहा जिस पर आपको गर्व हो… हम सभी को हिंदू होने पर गर्व है, हम सभी को राम का भक्त होने पर गर्व है। लेकिन आपने कभी यह नहीं कहा कि ‘देखिए, इस मंदिर के बनने से पहले जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था’।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब आप कहते हैं कि विविधता का जश्न मनाया जाना चाहिए, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसकी रक्षा की जानी चाहिए — तो आप इन चार बातों का जिक्र करते हैं, जश्न, सम्मान, स्वीकार्यता और सुरक्षा। क्या आपने कभी भारत में विविधता की रक्षा न होने पर आवाज उठाई है? क्या आपने कभी आवाज उठाई है? नहीं, कभी नहीं।’’
सिब्बल ने भागवत पर ऐसी राजनीति का समर्थन करने का आरोप लगाया जो विविधता-विरोधी है।
उन्होंने कहा, ‘‘आप ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं जो विविधता को न तो स्वीकार करती है, न उसका सम्मान करती है, न उसका जश्न मनाती है और न ही उसकी रक्षा करती है। और फिर भी आप न्यूयॉर्क में ये बातें कहते हैं क्योंकि आप एक अलग तरह के लोगों से बात कर रहे हैं।’’
सिब्बल ने भागवत के पहले दिए गए बयान कि इस देश में पैदा होने वाला हर व्यक्ति हिंदू है का जिक्र करते हुए उन पर विदेश में दोहरी बातें करने का आरोप लगाया।
राज्यसभा सदस्य ने इससे पहले सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ न्यूयॉर्क में भागवत: ‘विविधता हमारी स्वाभाविक एकता का आभूषण है। इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए’। विदेश में अच्छी बातें, घर में चुप्पी। शब्द मायने नहीं रखते, काम में नजर आना चाहिए।’’
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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