तपोवन विष्णुगाड परियोजना की सुरंग में पानी का रिसाव, काम रोका गया
तपोवन विष्णुगाड परियोजना की सुरंग में पानी का रिसाव, काम रोका गया
गोपेश्वर, 17 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में चमोली जिले के तपोवन-ज्योतिर्मठ क्षेत्र में स्थित नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की 520 मेगावाट तपोवन— विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की मुख्य सुरंग में भूधंसाव से एक ‘कैविटी’ (छोटा गड्ढा) बनने और उससे पानी का रिसाव होने के कारण एहतियातन सभी श्रमिकों को तत्काल बाहर निकालकर खुदाई का काम रोक दिया गया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी
एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह जयाड़ा ने बताया कि 15 अगस्त की सुबह परियोजना के डीबीएम क्षेत्र में ‘टनलिंग’ के दौरान एक छोटी ‘कैविटी’ बन गई जिसके चलते वहां पानी का हल्का रिसाव शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही संबंधित क्षेत्र में काम बंद करके सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया।
जयाड़ा के अनुसार, ‘टनलिंग’ के दौरान इस तरह की छोटी ‘कैविटी’ बनना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे फिलहाल किसी तरह का संभावित खतरा नहीं है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा मानकों के तहत ‘कैविटी’ (गड्ढे) के उपचार के बिना ‘टनलिंग’ का काम आगे नहीं बढ़ाया जाता। विशेषज्ञता प्राप्त श्रमिकों की टीम अब ‘कैविटी’ के उपचार में जुटी है जिसे पूरा करने के बाद ही ‘टनलिंग’ दोबारा शुरू की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सुरंग के प्रभावित हिस्से को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं और उपचार का काम जल्द पूरा हो जाएगा।
दो दशक पूर्व शुरू की गयी तपोवन-विष्णुगाड परियोजना का इतिहास प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ा रहा है। फरवरी 2021 में ऋषिगंगा घाटी में आई विनाशकारी बाढ़ ने परियोजना के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था। इस आपदा में करीब दो सौ लोगों की जान गई थी और परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा था।
इससे पहले भी, परियोजना की सुरंगों में पानी के रिसाव और भूगर्भीय चुनौतियों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होता रहा है। सैलंग गांव के पास बिजली घर की ओर जाने वाली मुख्य सुरंग में पानी आने के कारण करोड़ों रुपये की लागत वाली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) लंबे समय तक उसमें फंसी रही थी।
ताजा घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के दौरान सामने आने वाली भूगर्भीय चुनौतियों और सुरक्षा उपायों को लेकर चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, एनटीपीसी ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्से का उपचार सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।
भाषा सं दीप्ति अमित
अमित

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