महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए हम नीतियों को मजबूत कर रहे हैं: राजनाथ

महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए हम नीतियों को मजबूत कर रहे हैं: राजनाथ

महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए हम नीतियों को मजबूत कर रहे हैं: राजनाथ
Modified Date: August 22, 2025 / 07:33 pm IST
Published Date: August 22, 2025 7:33 pm IST

नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सशस्त्र बलों और शांति सेना में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए ‘‘हम नीतियों को मजबूत कर रहे हैं’ ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें नेतृत्व और सेवा करने के समान अवसर मिलें।

सिंह ने यह बात भारत के साथ-साथ 15 देशों की महिला अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान कही, जो यहां आयोजित लगभग दो सप्ताह लंबे संयुक्त राष्ट्र महिला सैन्य अधिकारी पाठ्यक्रम (यूएनडब्ल्यूएमओसी-2025) में भाग ले रही हैं।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र द्वारा 18-29 अगस्त, 2025 तक आयोजित इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य बहुआयामी संयुक्त राष्ट्र मिशनों में प्रभावी भागीदारी के लिए महिला सैन्य अधिकारियों की पेशेवर क्षमता का निर्माण करना है।

रक्षा मंत्री ने ‘साउथ ब्लॉक’ में अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में, ‘‘भारत महिलाओं की भागीदारी और इन अभियानों में उनके शामिल होने का प्रबल समर्थक रहा है’’ और यूएनडब्ल्यूएमओसी जैसी योजनाओं के माध्यम से, यह महिला अधिकारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में शांति स्थापना हेतु अनुकूल वातावरण बनाने के लिए तैयार करता है।

सिंह ने कहा, ‘‘हम अपने सशस्त्र बलों और शांति सेना टुकड़ियों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए नीतियों को मजबूत कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो कि उन्हें नेतृत्व और सेवा के समान अवसर मिलें।’’

बयान में सिंह के हवाले से कहा गया, ‘‘हम लैंगिक समानता और समावेशी नेतृत्व को बढ़ावा देने और एक ऐसा विश्व बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र और सैन्य योगदान देने वाले देशों के साथ काम करना जारी रखेंगे, जहां शांति न केवल कायम रहे, बल्कि विविधता और समानता के माध्यम से फलती-फूलती रहे।’’

यूएनडब्ल्यूएमओसी-2025 में आर्मेनिया, डीआर कांगो, मिस्र, आइवरी कोस्ट, केन्या, किर्गिज गणराज्य, लाइबेरिया, मलेशिया, मोरक्को, नेपाल, सिएरा लियोन, श्रीलंका, तंजानिया, उरुग्वे और वियतनाम के प्रतिभागियों के साथ-साथ 12 भारतीय महिला अधिकारी और पांच प्रशिक्षु भी शामिल हुए हैं, जिससे यह पाठ्यक्रम प्रशिक्षण और आदान-प्रदान के लिए एक जीवंत अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है।

सिंह ने 15 देशों के अधिकारियों की उपस्थिति को ‘‘संयुक्त राष्ट्र के सूक्ष्म जगत और उसकी एकता एवं सहयोग की चिरस्थायी भावना का प्रतिबिंब बताया’’।

उन्होंने अधिकारियों से कहा, ‘‘आप परिवर्तन के अग्रदूत हैं। आपका समर्पण न केवल शांति स्थापना को बल्कि वैश्विक सुरक्षा के ताने-बाने को भी मजबूत करता है। भारत आपके साथ खड़ा है, आपके योगदान पर गर्व करता है और आपकी यात्रा का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है।’’

रक्षा मंत्री ने शांति अभियानों में महिला अधिकारियों की भागीदारी बढ़ाने के संयुक्त राष्ट्र के दृष्टिकोण पर कहा कि यह प्रतिबद्धता इस मान्यता से उपजी है कि महिला शांति सैनिक मिशनों को अधिक प्रभावी, समावेशी और टिकाऊ बनाने के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘महिला अधिकारी शांति अभियानों में अमूल्य परिदृश्य और दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। वे अक्सर स्थानीय समुदायों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के साथ गहरा विश्वास पैदा करने में सक्षम होती हैं, जिनकी आवाज संघर्ष से त्रस्त समाजों के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण होती है।’’

रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र जर्नल 2025 – ‘ब्लू हेलमेट ओडिसी: 75 इयर्स ऑफ इंडियन पीसकीपिंग’ के प्लैटिनम जुबली संस्करण का भी विमोचन किया, जो संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में भारत की विरासत, नवाचारों और भविष्य के दृष्टिकोण को दर्शाता है।

हेलमेट के नीले रंग के बारे में चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि आकाश की तरह, संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक सुरक्षा और सुरक्षा की भावना प्रदान करते हैं, और महासागरों की तरह, वे सीमाओं और संस्कृतियों के पार संबंध कायम करते हैं।

इस मौके पर थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश


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