हम असली तृणमूल हैं, बागी गुट भाजपा प्रायोजित है: ममता बनर्जी

हम असली तृणमूल हैं, बागी गुट भाजपा प्रायोजित है: ममता बनर्जी

हम असली तृणमूल हैं, बागी गुट भाजपा प्रायोजित है: ममता बनर्जी
Modified Date: July 21, 2026 / 06:04 pm IST
Published Date: July 21, 2026 6:04 pm IST

कोलकाता, 21 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को पार्टी के बागी गुट पर तीखा हमला बोलते हुए उसे ‘‘भाजपा प्रायोजित’’ करार दिया।

उन्होंने विद्रोही नेताओं के साथ किसी भी तरह के समझौते या उनकी वापसी की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ‘‘असली तृणमूल कांग्रेस’’ उनके नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ी है।

मध्य कोलकाता में बिड़ला तारामंडल ‘प्लैनेटेरियम’ के निकट आयोजित पार्टी की ‘शहीद दिवस’ रैली को संबोधित करते हुए ममता ने स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी के संगठन, राजनीतिक विरासत और चुनाव चिह्न को लेकर जारी संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।

तृणमूल हर साल 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ मनाती है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘अगर भाजपा का समर्थन करना है, तो सीधे उसमें शामिल हो जाइए। भाजपा का ‘मौन सहयोगी’ मत बनिए। अगर हिम्मत है तो भाजपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़कर दिखाइए।’’

बागी नेताओं को चुनौती देते हुए ममता ने कहा, ‘‘मैं गद्दारों को चुनौती देती हूं कि वे भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़ें। आप में से जितने अधिक लोग पार्टी छोड़ेंगे, मुझे उतनी ही खुशी होगी। हर खाली जगह भरने के लिए हमारे छात्र और युवा कार्यकर्ता तैयार हैं।’’

उन्होंने पार्टी छोड़ चुके नेताओं की वापसी की संभावना भी खारिज कर दी। ममता ने कहा, ‘‘वे चोर भाजपा में चले गए हैं। मैं उन्हें कभी वापस नहीं लूंगी।’’

ममता का यह बयान ऐसे समय आया है जब 21 जुलाई को कोलकाता में अभूतपूर्व तीन-स्तरीय राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। एक ओर ममता के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट ने बिड़ला तारामंडल के निकट कैथेड्रल रोड पर ‘शहीद दिवस’ रैली आयोजित की, वहीं ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने मेयो रोड पर समानांतर कार्यक्रम किया। दूसरी ओर, कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने भी शहीद मीनार पर अलग रैली आयोजित की।

भाजपा पर निशाना साधते हुए ममता ने आरोप लगाया कि वह केंद्रीय एजेंसियों और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को दल बदलने के लिए मजबूर कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘वे दो महीने का इंतजार भी नहीं कर सके। अच्छा हुआ कि सारे चोर भाजपा में चले गए।’’

ममता ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य पुलिस का इस्तेमाल नेताओं को डराने-धमकाने तथा उन्हें पाला बदलने के लिए मजबूर करने में किया जा रहा है।

पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर जारी कानूनी लड़ाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे हमारा चुनाव चिह्न छीनने की कोशिश करेंगे, तो मैं उन्हें नहीं छोड़ूंगी। मैं उच्चतम न्यायालय जाऊंगी। चुनाव चिह्न छीना जा सकता है, लेकिन किसी राजनीतिक दल का असली प्रतीक वह होता है, जिसे जनता अपने दिल से स्वीकार करती है।’’

ममता ने यह भी आरोप लगाया कि कई जिलों में उनके समर्थकों को राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं जिलों का दौरा करूंगी। देखना चाहती हूं कि मुझे रोकने की ताकत किसमें है। यदि अनुमति नहीं मिली, तो हम सड़कों पर उतरेंगे।’’

उन्होंने 21 जुलाई की रैली आयोजित करने की अनुमति देने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का आभार व्यक्त किया। साथ ही, 1993 के पुलिस गोलीकांड में मारे गए लोगों के परिजनों का भी धन्यवाद किया, जो उनके अनुसार ‘‘धमकियों, उपेक्षा और प्रलोभनों’’ के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए।

ममता के रुख का समर्थन करते हुए तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी पार्टी नेतृत्व से बागी नेताओं को दोबारा शामिल नहीं करने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी अपनी नेता से केवल एक ही गुजारिश है। कृपया उन लोगों को वापस न लें, जिन्होंने पार्टी से विश्वासघात किया है। जिन्होंने तमाम प्रलोभनों के बावजूद पार्टी का साथ नहीं छोड़ा, वही असली तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं।’’

भाषा खारी पवनेश

पवनेश


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