हम तिलचट्टों की तरह फिर वापस आएंगे: कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा
हम तिलचट्टों की तरह फिर वापस आएंगे: कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) सोमवार सुबह घर से निकलने से पहले 17 वर्षीय अंशिका ने अपने परिवार को बताया था कि वह स्कूल जा रही है, लेकिन वह परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग करने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के विरोध मार्च में शामिल होने मध्य दिल्ली पहुंच गई।
संसद की ओर मार्च के दौरान, जब वह और अन्य प्रदर्शनकारी अवरोधकों पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें नीचे खींच लिया।
दिल्ली के बदरपुर की रहने वाली अंशिका ने अपने हाथ पर आए खरोंच के निशान दिखाते हुए कहा, ‘हम अपने परिवारों से झूठ बोलकर यहां इसलिए नहीं आए थे कि हमें अपराधियों की तरह उठाया जाए और हिरासत में लिया जाए।’
उन्होंने दावा किया कि उन्हें पैर पकड़कर नीचे खींचा गया और दो महिला पुलिसकर्मियों ने मजबूती से पकड़ लिया।
अंशिका ने कहा कि वह न केवल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से नाराज थीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत न होने से भी आहत थीं।
उन्होंने कहा, ‘जब चुनाव का समय होता है, तो वे हमारे घरों पर आते हैं और वोट मांगते हैं। लेकिन नीट पर्चा लीक मामले पर बातचीत करने के लिए वे आगे भी नहीं आए।’
अंशिका ने सवाल किया, ‘हम केवल बातचीत की मांग कर रहे हैं। क्या हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की भी अनुमति नहीं है?’
कुछ महिला प्रदर्शनकारी तैयारी के साथ आई थीं।
एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हम सब यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आए थे। लेकिन हमें यह भी बताया गया था कि हिरासत में लिए जाने या गिरफ्तार होने की स्थिति में हमारे क्या अधिकार हैं जैसे अपने परिवार को सूचित करने का अधिकार, वकील तक पहुंच और अपने खिलाफ लगे आरोपों को जानने का अधिकार।’
बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों की महिलाएं इस प्रदर्शन में शामिल हुईं।
इनमें से कई महिलाओं ने समूहों में दिल्ली की यात्रा की या व्हाट्सएप समूहों और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के माध्यम से अन्य प्रतिभागियों से संपर्क किया। इन नेटवर्कों ने उन्हें अपनी यात्रा के समन्वय, बैठक के स्थान तय करने और प्रदर्शन के दौरान एक-दूसरे के संपर्क में रहने में मदद की।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, समलैंगिक और ट्रांसजेंडर प्रतिभागियों को अलग संपर्क नेटवर्क प्रदान किए गए थे।
पूर्वा (27) ने कहा, ‘हम सभी ने पुणे से रात भर बस से एक साथ यात्रा की। हम एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आए और फैसला किया कि दिल्ली पहुंचने के बाद हम कहां मिलेंगे। हमसे समूहों में यात्रा करने, महत्वपूर्ण फोन नंबर अपने पास रखने और समूह के संपर्क में रहने के लिए कहा गया था।’
उन्होंने कहा कि समूहों ने इस बात की जानकारी भी साझा की थी कि यदि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वे क्या कर सकते हैं, जिसमें किससे संपर्क करना है और पुलिस की कार्रवाई का दस्तावेजीकरण कैसे करना है, शामिल था।
ये उपाय तब और महत्वपूर्ण हो गए जब नयी दिल्ली जिले में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं और उन्हें हिरासत में लिया गया।
बिहार के वैशाली की रहने वाली 20 वर्षीय किस्मत ने इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पटना से दिल्ली तक रात भर अकेले यात्रा की।
उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने परिवार से झूठ बोला और यहां आई क्योंकि नहीं तो वे मेरी सुरक्षा को लेकर चिंता करते।’
दिल्ली पहुंचने के बाद किस्मत अकेली नहीं थीं। फरीदाबाद के छात्रों के एक समूह की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि वह उनसे जंतर-मंतर पर मिली थीं और उनके साथ मार्च कर रही थीं।
किस्मत ने कहा, ‘तिलचट्टों की तरह, जो लाखों वर्षों से जीवित बचे हुए हैं, हम फिर से आएंगे और उम्मीद नहीं खोएंगे, चाहे प्रशासन या पुलिस हमें दबाने की कितनी भी कोशिश करे।’
अपने बेटे और बेटी के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं शोभा ने दावा किया कि उन्होंने झड़प के दौरान पुरुष पुलिसकर्मियों को महिलाओं को पीटते देखा।
उन्होंने कहा, ‘पुलिस ने खुद अवरोधकों को धक्का दिया और जब लोग आगे बढ़े, तो उन्होंने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। मैंने पुरुष पुलिसकर्मियों को एक महिला को पीटते देखा।’
सोमवार को मंडी हाउस, पटेल चौक, जनपथ, जंतर-मंतर और संसद मार्ग सहित कई इलाकों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, क्योंकि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने और संसद की ओर मार्च करने से रोकने की कोशिश की थी। प्रदर्शनकारियों द्वारा अवरोधकों को पार करने की कोशिश के बाद सुरक्षा बलों ने शास्त्री भवन के पास आंसू गैस के गोले भी छोड़े।
भाषा सुमित रंजन
रंजन

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