(तस्वीरों सहित)
समाना (पंजाब), 24 अप्रैल (भाषा) पंजाब में बेअदबी की घटनाओं के लिए सख्त कानूनों की मांग को लेकर करीब 560 दिनों से 400 फुट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठे कार्यकर्ता गुरजीत सिंह खालसा को आखिरकार शुक्रवार सुबह नीचे उतार लिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस घटनाक्रम के साथ ही गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहे खालसा (43) के अनूठे ढंग से किए जा रहे विरोध प्रदर्शन का समापन हो गया। उन्होंने 12 अक्टूबर 2024 को पटियाला के समीप समाना में स्थित टावर पर चढ़कर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
पटियाला के एक दमकल अधिकारी ने बताया कि दमकलकर्मियों, पुलिस और नगर निकाय के अधिकारियों की एक टीम ने विशेष ‘क्रेन-लिफ्ट’ की मदद से उन्हें नीचे उतारा।
खालसा को ‘सिख जयकारा’ और ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के नारों के बीच टावर से उतारने के बाद चिकित्सा जांच के लिए एम्बुलेंस में अस्पताल ले जाया गया। इस बीच उनके समर्थकों ने उन पर फूल बरसाए।
पटियाला जिले के खेड़ी नगैयां गांव के निवासी कार्यकर्ता ने जमीन पर कदम रखते हुए कहा, ‘‘हम जीत गए हैं।’’
खालसा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को बेअदबी विरोधी कानून लागू करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, ‘‘गुरु की कृपा से मैं 18 महीने और 12 दिन बाद सुरक्षित वापस आ गया हूं। मैं पंजाब सरकार का आभारी हूं।’’
खालसा ने उन्हें सुरक्षित नीचे लाने के लिए स्थानीय प्रशासन का भी आभार जताया।
पंजाब सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ संशोधित कानून ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को हाल ही में अधिसूचित कर दिया है, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के किसी भी कृत्य के लिए आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने समेत कठोर दंड का प्रावधान है।
इसे अधिसूचित किए जाने के बाद खालसा ने प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला किया।
खालसा ने कड़ाके की ठंड और भीषण गर्मियों में भी कई महीनों तक टावर के ऊपर रहकर कड़ी परिस्थितियों का सामना किया, जिससे इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे पंजाब का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
उन्हें रस्सियों के जरिए आवश्यक सामग्री भेजी गई।
पटियाला के सहायक अग्निशमन अधिकारी हरिंदरपाल सिंह ने कहा, “हमने जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से यह अभियान चलाया।’’
पेशे से किसान खालसा की मुख्य मांग गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधानों को लागू करना थी।
भाषा यासिर मनीषा
मनीषा