कल्याणकारी योजनाएं कमजोर वर्गों के उत्थान में मददगार, इसे ‘मुफ्त उपहार’ नहीं कहा जा सकता : द्रमुक

कल्याणकारी योजनाएं कमजोर वर्गों के उत्थान में मददगार, इसे 'मुफ्त उपहार' नहीं कहा जा सकता : द्रमुक

कल्याणकारी योजनाएं कमजोर वर्गों के उत्थान में मददगार, इसे ‘मुफ्त उपहार’ नहीं कहा जा सकता : द्रमुक
Modified Date: November 29, 2022 / 08:01 pm IST
Published Date: August 20, 2022 7:53 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि कल्याणकारी योजनाएं कमजोर वर्गों का उत्थान करती हैं और इसे ‘मुफ्त उपहार’ नहीं कहा जा सकता।

चुनाव के दौरान मुफ्त के उपहार का वादा करने के लिए राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका का विरोध करते हुए द्रमुक ने कहा कि याचिका ‘राजनीति से प्रेरित’ है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने उस समय यह जनहित याचिका दायर की थी, जब पंजाब में विधानसभा चुनाव होने थे। पार्टी ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस दल से संबंध रखते हैं वह दल भी पंजाब में चुनाव लड़ रहा था।

द्रमुक ने आरोप लगाया कि वर्तमान याचिका में कोई दम नहीं है और इसे पंजाब में एक अन्य प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के साथ राजनीतिक ‘हिसाब-किताब’ बराबर करने के लिए दायर किया गया है।

द्रमुक का कहना है कि कल्याणकारी योजना को ‘मुफ्त उपहार’ के रूप में वर्गीकृत करने के लिए लागू किए जाने वाले मानदंड इतने कठोर नहीं हो सकते कि सरकार द्वारा अपने नागरिकों को प्रदान की जाने वाली प्रत्येक सेवा को ‘मुफ्त उपहार’ की संज्ञा दी जाए।

द्रमुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन द्वारा पेश दलीलों में कहा गया है, ‘‘यदि इस तरह का अर्थ लागू किया जाता है, तो यह शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा जैसी सभी सरकारी सुविधाओं को मुफ्त उपहार की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देगा।’’

उन्होंने कहा कि याचिका खारिज किये जाने योग्य है। उन्होंने इसे राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों पर हमला करार देते हुए कहा कि यह इस देश के ताने-बाने को समाजवादी देश से पूंजीवादी देश में बदलने का प्रयास है।

भाषा सुरेश माधव

माधव


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