प. बंगाल सरकार ने जमीन हड़पने के मामले में अभिषेक बनर्जी के सहयोगी से हिरासत में पूछताछ की मांग की

प. बंगाल सरकार ने जमीन हड़पने के मामले में अभिषेक बनर्जी के सहयोगी से हिरासत में पूछताछ की मांग की

प. बंगाल सरकार ने जमीन हड़पने के मामले में अभिषेक बनर्जी के सहयोगी से हिरासत में पूछताछ की मांग की
Modified Date: August 19, 2026 / 01:05 pm IST
Published Date: August 19, 2026 1:05 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय सालबोनी जमीन हड़पने के मामले की जारी जांच में कथित तौर पर सहयोग नहीं कर रहे हैं और पुलिस को उनसे हिरासत में पूछताछ करने की जरूरत है।

शीर्ष अदालत ने छह अगस्त को जमीन हड़पने के मामले में रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को सरकारी जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।

राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से आग्रह किया कि रॉय को गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा वापस ले ली जाए क्योंकि वह कथित तौर पर पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं और सवालों से बच रहे हैं।

रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनके मुवक्किल अदालत के निर्देश के अनुसार पुलिस के समक्ष पेश हो रहे हैं और संविधान उन्हें कुछ न कहने का अधिकार देता है।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘संविधान (जांच एजेंसी के) गिरफ्तारी के अधिकार को भी सुरक्षित करता है।’’

सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को पुलिस द्वारा अब तक इकट्ठा की गई सामग्री भी सीलबंद लिफाफे में सौंपी। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस की सीलबंद लिफाफे में मिली रिपोर्ट देखने के बाद ही इस मामले की सुनवाई होगी।

शीर्ष अदालत ने इस मामले में रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी अपने छह अगस्त के आदेश की अवधि बढ़ा दी।

मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।

पीठ ने रॉय को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने आदेश में कहा था, ‘‘उनके साथ कोई वकील या कोई अन्य व्यक्ति नहीं होना चाहिए। वह सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक किसी भी जांच के लिए उपलब्ध रहेंगे जिसमें उन्हें समय समय पर विराम भी मिलेगा। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी पर रोक बनी रहेगी।’’

उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने इस मामले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।

रॉय के वकील ने दलील दी थी कि प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था और जांच के दौरान ही उनकी कथित संलिप्तता सामने आई थी।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


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