पश्चिम बंगाल : अंतिम चरण में 142 सीट पर मतदान शुरू, भवानीपुर पर सबकी नजर

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पश्चिम बंगाल : अंतिम चरण में 142 सीट पर मतदान शुरू, भवानीपुर पर सबकी नजर

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  • Publish Date - April 29, 2026 / 08:11 AM IST,
    Updated On - April 29, 2026 / 08:11 AM IST

कोलकाता, 29 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे एवं अंतिम चरण में 142 सीट पर बुधवार सुबह मतदान भारी सुरक्षा के बीच शुरू हो गया।

यह चरण न केवल राज्य के दक्षिणी जिलों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की असली परीक्षा है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के लिए सत्ता के दरवाजे खोलने का निर्णायक मौका भी साबित हो सकता है।

कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्व बर्धमान के मतदान केंद्रों के बाहर सुबह सात बजे से मतदाताओं की लंबी कतारें लग गईं।

पहले चरण में जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर बंगाल में अपनी पकड़ को बरकरार रखने की कोशिश की, वहीं अंतिम चरण में मुकाबला तृणमूल के सबसे मजबूत गढ़ में है।

सत्तारूढ़ पार्टी ने 2021 में इन 142 सीट में से 123 पर जीत हासिल की थी जबकि भाजपा को केवल 18 और इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) को एक सीट मिली थी। यह गणित बताता है कि भाजपा इस चरण को अपनी असली परीक्षा क्यों मान रही है। दक्षिण बंगाल में पैठ बनाए बिना, राज्य में सत्ता हासिल करने का रास्ता बहुत कठिन है।

इस चुनावी मुकाबले का केंद्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ भवानीपुर है। यहां उनका सामना विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी से हो रहा है।

इस चरण में 1.57 करोड़ महिलाओं और 792 ट्रांसजेंडर समेत कुल 3.21 करोड़ पात्र मतदाता हैं। मतदान 41,001 केंद्रों पर हो रहा है, जिनकी वेबकास्टिंग के माध्यम से निगरानी की जा रही है।

निर्वाचन आयोग ने सात जिलों में केंद्रीय बलों की 2,321 कंपनियां तैनात की हैं, जिनमें कोलकाता में सबसे अधिक 273 कंपनियां तैनात हैं।

इसके अलावा, 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं, जबकि मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।

पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को हुए मतदान में 93.19 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, जो राज्य में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।

दोनों खेमों ने इसे लेकर अलग-अलग दावे किए हैं। भाजपा इसे सत्ता-विरोधी लहर का संकेत मानती है, जबकि तृणमूल का दावा है कि यह बनर्जी की कल्याणकारी नीतियों के प्रति समर्थन है।

भाषा खारी अविनाश

अविनाश