व्हाट्सएप की नई निजता नीति भारतीय आईटी कानून के अनुरूप नहीं है: केंद्र ने अदालत में कहा

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व्हाट्सएप की नई निजता नीति भारतीय आईटी कानून के अनुरूप नहीं है: केंद्र ने अदालत में कहा

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  • Publish Date - May 17, 2021 / 11:21 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:48 PM IST

नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) केंद्र ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि उसे व्हाट्सएप की नई निजता नीति भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून एवं नियमों का उल्लंघन नजर आती है, इसलिए सोशल मीडिया मंच को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया जाए कि वह इसकी (आरोप की) पुष्टि कर रहा है।

केन्द्र सरकार ने मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के सामने यह दावा किया। पीठ व्हाट्सएप की नई निजता नीति को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस सोशल मीडिया मंच के अनुसार उसकी यह नीति 15 मई को प्रभाव में आ गयी और उसे टाला नहीं गया है।

व्हाट्सएप ने पीठ से कहा कि उसकी निजता नीति 15 मई से ही अमल में आ गई है और उसने उपयोगकर्ताओं का एकाउंट हटाना शुरू नहीं किया है एवं वह उन्हें इसे स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगा।

उसने कहा कि कोई एक-सी समयसीमा नहीं है जिसके बाद वह एकाउंटों को हटाना शुरू करेगा बल्कि हर उपयोगकर्ता से मामले-दर-मामले के आधार पर निपटा जाएगा।

पीठ ने केन्द्र सरकार और दोनों सोशल मीडिया मंचों (फेसबुक तथा व्हाट्सएप) को नोटिस जारी करते हुए उन्हें याचिकाओं में से उस एक याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया जिसमें याचिकाकर्ता एक वकील ने दावा किया है कि नई निजता नीति संविधान के तहत ऐप उपयोगकर्ताओं को प्रदत्त निजता के अधिकार का हनन करती है।

केंद्र ने कहा कि यह नीति भारतीय आईटी कानून एवं नियमों के विपरीत है इसलिए उसने फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को इस विषय पर पत्र लिखा है और जवाब का इंतजार है, ऐसे में इस नीति के क्रियान्यन के संबंध में यथास्थिति बनाये रखने की जरूरत है।

व्हाट्सएप ने पीठ से कहा कि उसकी नीति भारतीय आईटी कानून एवं नियमों के अनुरूप है और नीति 15 मई से ही अमल में आ गई है एवं वह एकाउंट तो हटा नहीं रहा है।

जब यह विषय प्रारंभ में एकल न्यायाधीश के सामने आया था तब केंद्र ने कहा था कि व्हाट्सएप, नयी नीति को स्वीकार नहीं करने के संदर्भ में भारतीयों को यूरोपीय से अलग ढंग से ले रहा है जो सरकार के लिए चिंता का विषय है और वह इस मामले पर गौर कर रहा है।

मामले पर अब तीन जून को आगे सुनवाई होगी।

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश