(फाइल फोटो के साथ)
चेन्नई, छह मार्च (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शुक्रवार को यह जानना चाहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी अन्य देश की मंजूरी की आवश्यकता क्यों है।
उनका यह बयान ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन के लिये अस्थायी छूट देने के बाद आया है।
स्टालिन ने यह भी कहा कि दो दिन पहले अमेरिकी सेना द्वारा श्रीलंका तट के पास ईरानी युद्धपोत ‘आईरिस देना’ को डुबोए जाने के बाद भारत चुप या निष्क्रिय नहीं रह सकता।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘जब अमेरिका भारत को केवल 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने का फैसला करता है, तो उससे एक मूलभूत प्रश्न खड़ा होता है। भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसी अन्य देश की मंजूरी की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए?’’
उन्होंने कहा, ‘‘इतना ही चिंताजनक यह भी है कि अमेरिका ने निहत्थे ईरानी युद्धपोत आईरिस देना को डुबो दिया, जिसने कुछ समय पहले ही भारत द्वारा विशाखापत्तनम में आयोजित एक नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया था।’’
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रमुख स्टालिन ने कहा कि जब भारत द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने वाले किसी पोत को इस तरह निशाना बनाया जाता है, तो भारत ‘चुप’ या ‘निष्क्रिय’ नहीं रह सकता।
स्टालिन ने भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बनाए रखने और उसके रणनीतिक हितों एवं संप्रभुता की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, “केंद्र की भाजपा सरकार भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति की दीर्घकालिक परंपरा से पूरी तरह समझौता करती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की गरिमा की रक्षा करने की आवश्यकता है और देश की संप्रभुता एवं हितों का बचाव करने की जरूरत है।”
ईरान का फ्रिगेट ‘आईरिस देना’ भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई।
भाषा राजकुमार दिलीप
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