निर्माण कार्य शुरू होने से पहले गुवाहाटी रिंग रोड का पारिस्थितिक अध्ययन कराए डब्ल्यूआईआई: अदालत
निर्माण कार्य शुरू होने से पहले गुवाहाटी रिंग रोड का पारिस्थितिक अध्ययन कराए डब्ल्यूआईआई: अदालत
गुवाहाटी, 29 मई (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) को 5,730 करोड़ रुपये की गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले आमचांग वन्यजीव अभयारण्य के पारिस्थितिक तंत्र को हो सकने वाले नुकसान का आकलन करने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की गुवाहाटी उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने परियोजना को सशर्त मंजूरी दी है, जिसके तहत निर्माण कार्य से पड़ सकने वाले प्रभाव का पूर्ण अध्ययन और रात में निर्माण कार्य पर कुछ प्रतिबंधों का पालन जरूरी है।
असम सरकार ने अर्काशीष चालिहा और महेश डेका द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में गुवाहाटी उच्च न्यायालय को अध्ययन कराने के फैसले की जानकारी दी। याचिका में गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना के क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठाया गया था।
सरकार ने उच्च न्यायालय को यह भी बताया कि गुवाहाटी वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी ने सड़क चौड़ीकरण के लिए आमचांग वन्यजीव अभयारण्य के अंदर पेड़ों की कटाई के वास्ते ठेकेदार के चयन के लिए ई-निविदा जारी की थी, लेकिन यह केवल इस काम के लिए ठेकेदार चुनने के उद्देश्य से थी।
आदेश में कहा गया कि ई-निविदा जारी करने का मतलब यह नहीं है कि देश के किसी वन्यजीव संस्थान या किसी अन्य विशेष एजेंसी द्वारा किए जाने वाले प्रभाव अध्ययन पर विचार किए बिना तत्काल काम शुरू कर दिया जाएगा।
इस साल फरवरी में गुवाहाटी वन्यजीव प्रभाग ने एक निविदा विज्ञापन में राज्य की राजधानी के ‘फेफड़े’ माने जाने वाले आमचांग वन्यजीव अभयारण्य में रिंग रोड के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर बोलियां आमंत्रित की थी।
विज्ञापन में ‘‘वन भूमि के हस्तांतरण से संबंधित पेड़ों की कटाई’’ के लिए परियोजना लागत 65,15,654 रुपये बताई गई थी और काम पूरा करने की अवधि 90 दिन तय की गई थी।
उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया, ‘‘भारतीय वन्यजीव संस्थान को परियोजना के प्रभाव का आकलन करने और ऐसे उपाय सुझाने के लिए अध्ययन करने को कहा गया है जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर कम से कम प्रभाव पड़े।’’
आदेश में कहा गया कि राज्य सरकार से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और संबंधित फाइल भारतीय वन्यजीव संस्थान को मिल गई है तथा अध्ययन के लिए तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव दो सप्ताह के भीतर तैयार किया जाए।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इसके बाद अध्ययन किया जाए और इस संबंध में धनराशि प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए। यह धनराशि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा उपलब्ध कराई जाए।’’
एनएचएआई के वकील ने उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि प्रभाव के इस तरह के अध्ययन के लिए धनराशि जारी करने में कोई देरी नहीं होगी।
सरकारी वकील ने उच्च न्यायालय को यह भी बताया कि अध्ययन के निष्कर्ष उपलब्ध होने से पहले कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा और परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वन्यजीवों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
पीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा, ‘‘सभी प्रतिबंधों और परामर्शों का पालन किया जाए। राज्य और क्रियान्वयन एजेंसी एनएचएआई द्वारा दिए गए आश्वासन के मद्देनजर हम इस जनहित याचिका को आगे जारी रखना आवश्यक नहीं समझते।’’
आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता यातायात प्रबंधन और पशु गलियारे को बचाने के लिए सड़क की आवश्यकता को देखते हुए परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं।
आदेश में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ताओं ने दोहराया कि रिंग रोड के निर्माण की सख्त जरूरत है, लेकिन साथ ही अभयारण्य का संरक्षण भी जरूरी है क्योंकि यह कई प्रजातियों के जीवों का घर है।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन से प्रभावित होने वाले क्षेत्र में वन और निकटवर्ती हाथी गलियारा भी शामिल होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल सितंबर में 5,730 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना की आधारशिला रखी थी।
भाषा सिम्मी शोभना
शोभना

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