‘जेन जी’ के भविष्य की रक्षा के लिए एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ूंगा : नवीन पटनायक

Ads

‘जेन जी’ के भविष्य की रक्षा के लिए एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ूंगा : नवीन पटनायक

  •  
  • Publish Date - September 28, 2026 / 03:21 PM IST,
    Updated On - September 28, 2026 / 03:21 PM IST

भुवनेश्वर, 28 सितंबर (भाषा) बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख नवीन पटनायक ने सोमवार को कहा कि वह ‘‘जेन जी के भविष्य की रक्षा’’ के लिए एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ ‘‘आखिरी सांस तक’’ लड़ेंगे।

ओडिशा विधानसभा के बाहर खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को निरस्त करने की मांग को लेकर आयोजित बीजद की रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की जनता और राजनीतिक दलों से नए खनन कानून का मिलकर विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह कानून ‘‘राज्य के अधिकार छीन लेता है’’।

पांच बार ओडिशा के मुख्यमंत्री रह चुके पटनायक ने कहा, ‘‘यह नया कानून राज्य की जमीन और संसाधनों पर उसके अधिकार छीनने की कोशिश करता है। इसलिए, मैं एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ अपनी आखिरी सांस तक लड़ूंगा।’’

साल 2024 के चुनावों के बाद भुवनेश्वर में अपनी पहली जनसभा को संबोधित करते हुए पटनायक ने दावा किया कि नए खनन कानून के लागू होने के बाद ओडिशा को राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये का नुकसान होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी लोगों और राजनीतिक दलों से आह्वान करता हूं कि वे हाथ मिलाएं और हमारी जेन जी के भविष्य के लिए एमएमडीआर अधिनियम का विरोध करें। ओडिशा की भावी पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी, अगर हम इस कानून के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ते, जो हमारे वैध अधिकार छीन लेता है।’’

बीजद अध्यक्ष ने राज्य के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसदों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अगस्त में जब एमएमडीआर संशोधन विधेयक पारित किया गया, तब वे संसद में चुप रहे।

उन्होंने पूछा, ‘‘जब इस अधिनियम के कारण ओडिशा को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने वाला है, तब राज्य की भाजपा सरकार और पार्टी के करीब 20 सांसद चुप क्यों हैं?’’

पटनायक ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम ‘‘कोई साधारण कानून नहीं है’’ और इसका संबंध राज्य के अधिकारों से गहराई से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने पूछा, ‘ओडिशा की जनता ही राज्य के खनिजों और भूमि की वास्तविक मालिक है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया। राज्य के 20 भाजपा सांसद किसके हितों की पूर्ति के लिए चुप रहे?’’

उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा सरकार भी चुप रही… किसके डर से?’’

संसद में एमएमडीआर अधिनियम पारित होने के बाद इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे अपने पत्रों का जिक्र करते हुए पटनायक ने कहा कि उन्होंने उनसे दो बार पत्र लिखकर आग्रह किया था कि कानून का विरोध करने और इसके खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मुझे मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। मुझे इस बात पर भी हैरानी हुई कि 20 सांसदों को लिखे मेरे पत्रों का भी कोई जवाब नहीं आया।’’

पटनायक ने 29 अगस्त को ओडिशा के भाजपा सांसदों को भी पत्र लिखकर नए खनन कानून को वापस लेने की मांग करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि इन बदलावों से खनिज अधिकारों और खनिज वाले भूखंडों पर कर लगाने की राज्य की शक्तियां सीमित हो जाएंगी।

उन्होंने पत्र में कहा था, ‘‘मैं आप (भाजपा सांसदों) से गंभीरतापूर्वक अपील करता हूं कि अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और ओडिशा की भावी पीढ़ियों के बारे में सोचें। मैं आपसे अपील करता हूं कि एमएमडीआर अधिनियम में किए गए उस संशोधन को चुनौती दें और उसे वापस लेने की मांग करें, जो राज्य सरकार की शक्तियां छीन लेता है।’’

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की भाजपा सरकार की भी आलोचना की, जिसने 24 वर्षों के बाद उनकी सरकार को बेदखल किया था। उन्होंने माझी प्रशासन को ‘खोखले भाषणबाज़ी का उस्ताद’ करार दिया।

संसद ने अगस्त में खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। इस कानून का उद्देश्य खनिज अधिकारों और खनिज वाले भूखंडों पर कर लगाने की राज्यों की शक्तियों को सीमित करना है।

भाषा तान्या दिलीप

दिलीप