बेंगलुरु, नौ जनवरी (भाषा) कर्नाटक के कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदागी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल केरल के कासरगोड में कन्नड़ भाषी लोगों पर मलयालम भाषा थोपे जाने के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल सरकार के मलयालम भाषा विधेयक के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली कन्नड़ भाषी आबादी परेशानी का सामना कर रही है।
तंगदागी ने पत्रकारों से कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350(ख) के अनुसार भाषाई अल्पसंख्यकों को संरक्षण मिलना चाहिए, केरल-कासरगोड के लिए भाषाई अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए और वहां रहने वाले लोगों की राय ली जानी चाहिए।
मंत्री ने कहा, “राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजे गए मलयालम भाषा विधेयक ने सीमावर्ती कस्बों में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों को मुश्किल में डाल दिया है। हम भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और उन्हें इस घटनाक्रम से अवगत कराएंगे।”
मंत्री के अनुसार, केरल के कासरगोड क्षेत्र में लगभग 75 लाख कन्नड़ भाषी लोग रहते हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 210 कन्नड़ विद्यालय चालू हैं।
उन्होंने कहा,“कन्नड़ भाषी लोगों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। हम भी ऐसा नहीं होने देंगे। मैं कासरगोड में एक टीम भेजने पर विचार कर रहा हूं।”
कर्नाटक सीमा क्षेत्र विकास प्राधिकरण (केबीएडीए) के सचिव प्रकाश मत्तिहल्ली ने केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें स्थिति से अवगत कराया।
तंगदागी ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल से विधेयक को मंजूरी न देने का अनुरोध भी किया है।
उन्होंने कहा, “मैं इस मामले को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के संज्ञान में भी लाऊंगा और इस संबंध में उठाए जाने वाले कदम के बारे में भी उन्हें सूचित करूंगा।”
भाषा जितेंद्र नरेश
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