खान एवं खनिज विधेयक का सभी लोकतांत्रिक और कानूनी मोर्चों पर विरोध करेगी : हेमंत सोरेन

खान एवं खनिज विधेयक का सभी लोकतांत्रिक और कानूनी मोर्चों पर विरोध करेगी : हेमंत सोरेन

खान एवं खनिज विधेयक का सभी लोकतांत्रिक और कानूनी मोर्चों पर विरोध करेगी : हेमंत सोरेन
Modified Date: August 20, 2026 / 07:42 pm IST
Published Date: August 20, 2026 7:42 pm IST

रांची, 20 अगस्त (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार ‘ खान एवं खनिज (विकास तथा नियमन) संशोधन विधेयक 2026’ का हर लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी स्तर पर विरोध करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्यों को भरोसे में लिए बिना इस विधेयक को पारित करा लिया है।

सोरेन ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘केंद्र ने एमएमडीआर अधिनियम में जो बदलाव किए हैं, वे बहुत नुकसानदेह और वाकई दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इनका राज्य के प्रत्येक आदिवासी, दलित, गरीब व्यक्ति, किसान और मजदूर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’’

राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष सोरेन ने यहां सोहराई भवन में पार्टी की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें एमएमडीआर विधेयक सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई।

सोरेन ने राज्य सरकारों से विचार-विमर्श किए बिना विधेयक पारित कराने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाया और पूछा कि इन बदलावों से होने वाले नुकसान की भरपाई राज्यों को कौन करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘जो भारी नुकसान होना तय है, उसकी भरपाई कौन करेगा? ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार पुराने नुकसान की भी भरपाई नहीं करेगी।’’

सोरेन ने कहा कि झारखंड ने कोयला कंपनियों से बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये के लिए केंद्र के पास पहले ही दावा पेश कर दिया है।

संसद ने 13 अगस्त को खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया।

यह विधेयक खनिज अधिकार और खनिज पदार्थ से युक्त जमीनों पर कर लगाने के राज्यों के अधिकारों को सीमित करने का प्रस्ताव करता है।

सोरेन ने कहा, ‘‘हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और लोकतांत्रिक, संवैधानिक तथा कानूनी स्तरों पर भी इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विकसित राज्यों के प्रति कहीं ज़्यादा संवेदनशील दिखती है और उनके प्रति अधिक जवाबदेही महसूस करती है।

उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासियों, दलितों या पिछड़े वर्गों के प्रति सहानुभूति का कोई संकेत नहीं है।’’

मुख्यमंत्री ने इसे झारखंड के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि वह इस मामले पर चर्चा जारी रखेंगे और भविष्य की रणनीति तय करेंगे।

उन्होंने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस विधेयक पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।

भाषा धीरज संतोष

संतोष


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