नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने निर्वाचन आयोग से जुड़ी एक खबर का हवाला देते हुए बुधवार को सवाल किया कि क्या राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन उस लंबित नोटिस पर निर्णय लेंगे जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई है।
उन्होंने यह टिप्पणी उस वक्त की है जब अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर में दावा किया गया है कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और प्रक्रियागत बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में निर्वाचन आयोग के भीतर से सामने आए कथित दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ये दस्तावेज लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज सवाल केवल ‘‘वोट चोरी’’ का नहीं, बल्कि ‘‘भारत के लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं पर सरकार द्वारा कब्जा करने’’ का है।
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को प्रधानमंत्री से जवाब मांगना होगा और ‘‘भारत के लोगों से लोकतंत्र छीनने का षड्यंत्र करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।’’
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार लिखित रूप से आपत्तियां दर्ज कराईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन आपत्तियों में फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग, सॉफ्टवेयर के गलत इस्तेमाल, मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर और पारदर्शिता के अभाव में फैसले किए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए थे।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से 13.8 करोड़ नाम बाहर किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कई विपक्षी दल पिछले कई वर्षों से चुनावों की निष्पक्षता और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन उनके सवालों को कथित तौर पर गंभीरता से नहीं लिया गया।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘‘वोट चोरी’’ और एसआईआर को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं और अब निर्वाचन आयोग के भीतर से सामने आए दस्तावेज इन सवालों को सही साबित कर रहे हैं।
खरगे ने कहा कि निर्वाचन आयोग के भीतर से सामने आए दस्तावेजों से केंद्र सरकार तथा भाजपा-आरएसएस की भूमिका को लेकर ‘‘अत्यंत गंभीर सवाल’’ खड़े होते हैं।
दरअसल, 24 अप्रैल को विपक्षी दलों ने राज्यसभा में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए नया नोटिस सौंपा था। नोटिस में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे और संविधान के अनुच्छेद 324(5) सहित संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया गया था।
भाषा हक तान्या मनीषा
मनीषा