सीएए के तहत विदेशी घोषित महिला को भारत की नागरिकता मिली

सीएए के तहत विदेशी घोषित महिला को भारत की नागरिकता मिली

सीएए के तहत विदेशी घोषित महिला को भारत की नागरिकता मिली
Modified Date: March 7, 2026 / 05:23 pm IST
Published Date: March 7, 2026 5:23 pm IST

गुवाहाटी, सात मार्च (भाषा) असम के कछार जिले में विदेशी घोषित किए जाने के बाद दो साल हिरासत में बिताने वाली एक महिला को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। महिला के वकील ने यह जानकारी दी।

धोलाई विधानसभा क्षेत्र के हवैथांग इलाके की निवासी 59-वर्षीय दीपाली दास नामक महिला को फरवरी 2019 में एक विदेशी अधिकरण (एफटी) द्वारा अवैध प्रवासी घोषित किया गया था।

दीपाली असम की पहली घोषित विदेशी है, जिसे एक बार निरुद्ध केंद्र में रखा गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था, ताकि उसे सीएए के तहत भारतीय नागरिकता मिल सके।

उसके वकील धर्मानंद देब ने बताया कि अधिकरण के आदेश के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और उसी वर्ष 10 मई को सिलचर के निरुद्ध केंद्र भेज दिया, जहां वह लगभग दो साल तक रही और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद 17 मई 2021 को जमानत पर रिहा हुई।

उन्होंने बताया कि दीपाली मूल रूप से बांग्लादेश के सिलहट जिले के धीराई थानांतर्गत आने वाले दिपपुर गांव की निवासी है और उसने 1987 में हबीगंज जिले के बनियाचोंग थाने के अंतर्गत पराई गांव के अभिमन्यु दास से शादी की थी।

एक साल बाद 1988 में दंपति भारत में दाखिल हुआ और कछार जिले में बस गए और तब से वहां रह रहा है।

देब ने बताया कि 2013 में पुलिस द्वारा उसके खिलाफ जांच शुरू करने के बाद उसकी नागरिकता पर सवाल उठने लगे और दो जुलाई 2013 को पुलिस ने एक आरोप-पत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि दीपाली बांग्लादेश के बानियाचोंग की निवासी थी और मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर गई थी।

उन्होंने कहा, ‘बाद में सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए उसके आवेदन में आरोप-पत्र महत्वपूर्ण साबित हुआ क्योंकि आवेदक को बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान से भारत आने संबंधी दस्तावेजी सबूत पेश करने होते हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘अधिकांश मामलों में आवेदक ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, लेकिन दीपाली के मामले में पुलिस अधिकारी द्वारा 2013 में प्रस्तुत आरोप-पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि वह बांग्लादेश की निवासी थी। अधिकारियों ने इस दस्तावेज को वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया।’’

वर्ष 2021 में जमानत पर रिहा होने के बाद वह सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहती थी और अधिनियम के नियमों को 2024 में अधिसूचित किए जाने के बाद उसने कानूनी सहायता के लिए देब से संपर्क किया था।

उसकी पहली सुनवाई पिछले साल 24 फरवरी को सिलचर स्थित डाकघर अधीक्षक के कार्यालय में हुई थी, जिन्हें इस तरह के आवेदनों पर कार्रवाई करने के लिए नामित किया गया है।

इसके बाद दो और सुनवाई हुई, जिसके बाद उसके सभी दस्तावेज गृह मंत्रालय (एमएचए) को ऑनलाइन जमा कर दिए गए।

दास से पहले, असम में रहने वाले चार बांग्लादेशी नागरिकों को सीएए के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई थी।

भाषा शुभम सुरेश

सुरेश


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