कोलकाता, तीन जुलाई (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों का आह्वान किया कि वे आम लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम करें।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित पश्चिम बंगाल का निर्माण आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि हर विधायक न केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि जनता की सामूहिक आकांक्षाओं का भी प्रतिनिधित्व करता है।
बिरला का कहना था, ‘‘बंगाल के आम लोगों की उम्मीदों को पूरा करते हुए उनका लक्ष्य हमेशा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाना होना चाहिए।’’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पश्चिम बंगाल के महान विचारकों और विभूतियों ने सामाजिक सुधार, स्वतंत्रता संग्राम, आध्यात्मिकता, धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा, ‘‘वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ बंगाल ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई आवाज दी थी।
विधायकों को बंगाल की विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को फिर से समृद्ध बनाने के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए। उन्हें भारत को विकसित राष्ट्र बनाने और लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से लोकतंत्र को सशक्त करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।’’
बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों हो सकती हैं, लेकिन लोकतांत्रिक परंपराएं और उत्कृष्ट संवाद की संस्कृति हमेशा कायम रहनी चाहिए।
उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों से वरिष्ठ सदस्यों के अनुभवों से सीखने तथा विधानसभा की पुरानी कार्यवाहियों का अध्ययन करने का आग्रह किया।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘नवनिर्वाचित विधायकों में सीखने और समझने की इच्छा के साथ-साथ नवाचार की भावना भी होनी चाहिए।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधायकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटलीकरण के दौर में स्वयं को अद्यतन रखना चाहिए।
बिरला ने कहा कि नवनिर्वाचित सदस्यों को सदन में अधिकतम समय तक उपस्थित रहना चाहिए और अन्य विधायकों के वक्तव्यों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।
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