सरकार की विफल नीतियों के कारण भारी दबाव में श्रमिक वर्ग: कांग्रेस
सरकार की विफल नीतियों के कारण भारी दबाव में श्रमिक वर्ग: कांग्रेस
नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने नोएडा में मजदूरों का विरोध प्रदर्शन हिंसक होने के बीच मंगलवार को दावा किया कि मोदी सरकार की “विफल नीतियों” के कारण देश का श्रमिक वर्ग भारी दबाव में जी रहा है और उनके बीच गहरी निराशा का माहौल है।
कांग्रेस के प्रभारी महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल के दौरान लागू किए गए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मजदूरों और श्रमिकों के लिए मनरेगा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता था।
भाजपा के नेतृत्व वाली मौजूदा राजग सरकार ने मनरेगा योजना में बदलाव करके ‘‘वीबी जी राम जी’’ नामक नयी योजना लागू की है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “श्रमिकों को यह भरोसा था कि यदि वे अपने गांव लौटते हैं, तो उन्हें रोजगार की गारंटी मिलेगी या घर पर उनके परिवार के सदस्य मनरेगा के तहत काम करके घर चलाने में मदद कर सकेंगे। लेकिन मोदी सरकार ने भारत के श्रमिकों की इस जीवनरेखा को भी ‘बुलडोजर’ चलाकर खत्म कर दिया।”
उन्होंने कहा, “हमारे श्रमिक भाई-बहन भारत की प्रगति की धुरी हैं। वे एक तरफ महंगाई का बोझ झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके रोजगार की बुनियाद मनरेगा को कमजोर कर दिया गया है।”
रमेश ने दावा किया कि इसका परिणाम श्रमिकों के बीच गहरी निराशा के रूप में सामने आया है और सोमवार को नोएडा में जो कुछ हुआ, वह इसी स्थिति का सीधा नतीजा है।
उन्होंने कहा, “आज मोदी सरकार की विफल नीतियों के कारण देश का श्रमिक वर्ग भारी दबाव में जी रहा है।”
बाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए असंगठित श्रमिक एवं कर्मचारी कांग्रेस (केकेसी) के अध्यक्ष उदित राज ने कई राज्यों में संविदा श्रमिकों के “व्यापक शोषण” का मुद्दा उठाया और हालिया मजदूर आंदोलनों को कम वेतन और नयी श्रम संहिताओं के लागू होने से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि नोएडा, मानेसर, फरीदाबाद और भिवंडी में पैदा हुई अशांति संविदा श्रमिकों को 11,000 से 12,000 रुपये मासिक वेतन मिलने समेत विभिन्न व्यापक समस्याओं को दर्शाती है।
राज ने कहा कि विरोध के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित वेतन संशोधन “अपर्याप्त” हैं। उन्होंने कहा कि खासकर नोएडा जैसे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जीवनयापन लागत को देखते हुए संशोधित वेतन कतई पर्याप्त नहीं है।
भाषा जोहेब सुरेश
सुरेश

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