यमुना बाढ़: दिल्ली के निचले इलाकों में रहने वालों को सामना करना पड़ रहा है कई समस्याओं का

यमुना बाढ़: दिल्ली के निचले इलाकों में रहने वालों को सामना करना पड़ रहा है कई समस्याओं का

यमुना बाढ़: दिल्ली के निचले इलाकों में रहने वालों को सामना करना पड़ रहा है कई समस्याओं का
Modified Date: September 3, 2025 / 07:42 pm IST
Published Date: September 3, 2025 7:42 pm IST

(तस्वीर के साथ जारी)

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण दिल्ली के निचले इलाकों की सड़कों और बाजार में पानी भर गया जिससे इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मजनू का टीला, मदनपुर खादर और बदरपुर के निवासी यमुनाजल स्तर बढ़ने के कारण अब अस्थाई आश्रय स्थलों में रह रहे हैं और पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं।

यमुना का जलस्तर बुधवार को दोपहर एक बजे 207 मीटर दर्ज किया गया।

प्राधिकारियों ने निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया और लोहे के रेलवे पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया। प्रभावित हुए इन परिवारों के लिए असली चुनौती तब शुरू होगी जब नदी का जलस्तर कम होना शुरू होगा क्योंकि उन्हें अपने जीवन को पटरी पर लाने के लिए नये सिरे से संघर्ष करना पड़ेगा।

मजनू का टीला के बाजार में पानी भरने के कारण सन्नाटा छा गया।

दुकानदार अनुप थापा ने कहा, ‘हमने अपनी दुकान से ज्यादातर सामान हटा लिया लेकिन कुछ सामान खराब हो गया। पानी निकलने के बाद दुकान की मरम्मत करनी होगी जिसकी कीमत हमें चुकानी पड़ेगी।’

थापा अपनी पत्नी और तीन साल की बेटी के साथ सड़क किनारे शिविर में रह रहे हैं।

उन्होंने बाढ़ के पानी के ऊपर बिजली के लटकते तारों को चिन्हित करते हुए कहा, ‘यह वर्ष 2023 के बाद दूसरी बार है। मैं सरकार से सड़कों को साफ करने और क्षेत्र को ठीक कराने का आग्रह करता हूं ताकि ऐसी घटनाएं फिर न हों।’

मदनपुर खादर में झुग्गी में रहने वाले परिवार अब पुराने प्लास्टिक शीट के तम्बू में रह रहे हैं। एक निवासी तायरा ने कहा, ‘हमारा ज्यादातर सामान अंदर है। हम बड़ी मुश्किल से कुछ चीजें निकाल पा रहे। महिलाएं कई सारी समस्याओं का सामना कर रही हैं क्योंकि शौचालय नहीं हैं।’

आवारा कुत्ते भी बढ़ते पानी से बचने के लिए सुनसान घरों की सीढ़ियों पर चढ़ गए हैं।

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, ‘परिवारों के पास न तो भोजन था और न ही बर्तन, और वे केवल बिस्कुट और बन से काम चला रहे हैं। हम अपने लिए आवश्यक खाना भी नहीं ला सके और अब हमारे पास खाना पकाने की कोई सुविधा भी नहीं है। हम कियोस्क से जो कुछ भी खरीद सकते हैं, उसी पर जीवित रह रहे हैं।’

लोग कमर तक भरे पानी में अपने बुजुर्ग माता-पिता की मदद करते देखे गए, जबकि कुछ लोग सड़क किनारे छोटे-छोटे तंबुओं में अपनी बची-खुची चीजें लेकर बैठे रहे। कारें, मोटरसाइकिलें और फर्नीचर पानी में डूब गए, जबकि कई निवासी दूर खड़े असहाय होकर अपने घरों को डूबते हुए देख रहे थे।

मोनेस्ट्री मार्केट के दुकानदार सचिन यादव ने कहा, ‘हमारी दुकान कल से बंद है। पूरा परिवार इसपर ही निर्भर है। पानी कम होने में कई दिन लगेंगे और तब तक हमारी आमदनी नहीं होगी।’

यमुना बाजार में स्थिति ऐसी नजर आ रही थी जैसे घर और दुकानें नदी के बीच में हों।

दुकानदार रोहित कुमार ने कहा, ‘अभी महीना शुरू ही हुआ है और हमारी कमाई खत्म हो चुकी है। पानी कम होने के बाद भी हमें किराया देना है और सब कुछ फिर से व्यवस्थित करना होगा।’

इसी तरह, बदरपुर में भी बाढ़ के पानी के ऊपर घरों की छतें मुश्किल से दिखाई दे रही थीं। एक निवासी आसिफ अपने सिर पर सामान रखे खड़ा था। उसने कहा, ‘मैंने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहने के लिए सालों की मेहनत से यह घर बनाया था, और अब यह पानी में डूबा हुआ है। हम कहां जाएं? अब भी लोग अंदर फंसे हुए हैं।’

भाषा

राखी माधव

माधव


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