उत्तर प्रदेश में युवा सलाहकार परिषद का गठन किया जाए : भाजपा विधायक

उत्तर प्रदेश में युवा सलाहकार परिषद का गठन किया जाए : भाजपा विधायक

उत्तर प्रदेश में युवा सलाहकार परिषद का गठन किया जाए : भाजपा विधायक
Modified Date: July 28, 2026 / 07:40 pm IST
Published Date: July 28, 2026 7:40 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजेश्वर सिंह ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ‘युवा सलाहकार परिषद’ गठित करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि नयी पीढ़ी विशेष रूप से ‘जेन-जेड’, शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), प्रतियोगी परीक्षाओं, स्टार्टअप समेत विभिन्न विषयों पर नीति-निर्माण की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बन सके।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व अधिकारी रहे सिंह ने इस संबंध में चार पृष्ठ का एक पत्र मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को भेजा।

यह प्रस्ताव देशभर में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के बैनर तले हुए प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आया है। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से ‘जेन-जेड’ छात्रों के नेतृत्व में ‘नीट-यूजी 2026’ प्रश्नपत्र लीक मामले के बाद हुए जिसके चलते धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

विधायक के अनुसार, प्रस्तावित ‘युवा सलाहकार परिषद’ प्रधानमंत्री के विशेषज्ञ सलाहकार परिषद की तर्ज पर कार्य करेगी।

उन्होंने कहा कि परिषद के सदस्य युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रतियोगी परीक्षाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर नीति-निर्माण में योगदान देंगे।

पत्र में कहा गया है, ‘‘सुशासन के अगले चरण में युवाओं को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक नीति के निर्माण में सक्रिय भागीदार के रूप में सशक्त बनाया जाना चाहिए।’’

लखनऊ की सरोजिनी नगर विधानसभा सीट से विधायक सिंह ने कहा, ‘‘प्रस्तावित परिषद युवाओं को अपने विचार, आकांक्षाएं और अनुभव साझा करने का अवसर देगी, जिससे वे नीति-निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बन सकेंगे।’’

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तकनीकी बदलाव, प्रतियोगी परीक्षाओं, बदलते श्रम बाजार, उद्यमिता, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण तेजी से हो रहे परिवर्तनों को देखते हुए सरकारों के लिए युवाओं के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि केवल समय-समय पर होने वाले परामर्श अब पर्याप्त नहीं हैं।

सिंह ने सुझाव दिया कि परिषद में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए।

भाजपा विधायक ने कहा कि परिषद में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा छात्र, आईआईटी-जेईई और नीट के मेधावी अभ्यर्थी, आईआईटी, आईआईएम, एम्स, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) तथा दुनिया के अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों के छात्र एवं पूर्व छात्र, युवा वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्यमी, नवोन्मेषक, खिलाड़ी, किसान तथा आकांक्षी जिलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इनमें कम से कम 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का हो।

उन्होंने कहा, ‘‘परिषद से समय-समय पर ‘यूथ पल्स रिपोर्ट’ तैयार कर नीति-निर्माताओं को सौंपने के लिए कहा जा सकता है। इनमें रोजगार, शिक्षा, भर्ती सुधार, कौशल विकास, स्टार्टअप, मानसिक स्वास्थ्य, खेल, डिजिटल सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर साक्ष्य-आधारित सिफारिशें शामिल हों।’’

सिंह ने कहा, ‘‘किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा होते हैं। जब युवाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में भागीदार बनाया जाता है, तो सरकारें अधिक जवाबदेह, नवोन्मेषी और भविष्य के लिए तैयार बनती हैं। सहभागी शासन एक सशक्त लोकतंत्र की सबसे मजबूत आधारशिलाओं में से एक है।’’

उन्होंने कहा कि यदि यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश में लागू होता है, तो मुख्यमंत्री की अगुवाई वाली ‘युवा सलाहकार परिषद’ को संस्थागत रूप देने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा और यह शासन का ऐसा मॉडल होगा, जिसे पूरे देश में अपनाया जा सकेगा।

भाषा रविकांत दिलीप

दिलीप


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