DMK Minister Periyakaruppan loses by one vote || Image- DMK File
चेन्नई: तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर करते हुए राज्य के 108 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। (DMK Minister Periyakaruppan loses by one vote) वही इस चुनावी प्रदर्शन के बीच एक बेहद रोचक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां डीएमके के वरिष्ठ मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन को तिरुप्पत्तुर विधानसभा सीट पर सिर्फ एक वोट से हार का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, इस सीट पर टीवीके के उम्मीदवार सीनीवास सेठुपति आर ने जीत दर्ज की है। अंतिम मतगणना में सेठुपति को 83,375 वोट मिले, जबकि डीएमके मंत्री पेरियाकरुप्पन उनसे मात्र एक वोट से पीछे रह गए। वही एक वोट से मिली हार ने पूरे राज्य के सियासत में हलचल पैदा कर दी है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि एक वोट से जीत और हार का अंतर भारतीय चुनावी इतिहास में बेहद दुर्लभ माना जाता है। यह नतीजा टीवीके और डीएमके के बीच कड़े मुकाबले को भी जाहिर करता है।
इसी बीच एक मतदाता का सोशल मीडिया पोस्ट भी वायरल हो रहा है, जिसने इस जीत को और खास बना दिया। सिवगंगा जिले की इस सीट के एक मतदाता मणिकंदन शिवानंथम ने बताया कि वे वोट डालने के लिए ओमान के मस्कट से भारत आए थे। (DMK Minister Periyakaruppan loses by one vote) मणिकंदन ने लिखा कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने मस्कट से आकर वोट डाला और संभव है कि उनका वोट ही इस एक वोट के अंतर वाली जीत में निर्णायक साबित हुआ हो। इस घटना ने चुनाव परिणाम को और भी ज्यादा चर्चित बना दिया है।
#WATCH | In a dramatic finish in Tirupattur, #TVK candidate Srinivasa Sethupathi edged past #DMK’s Periyakaruppan by just one vote, with a final count of 83,375 to 83,374. A Tirupattur voter who flew in from Muscat to cast his ballot for #Vijay‘s TVK said he was proud to be part… pic.twitter.com/hwPm7dljvH
— The Federal (@TheFederal_News) May 5, 2026
बता दें कि, कल याने 4 मई को जारी चुनावी नतीजों में सत्ताधारी DMK को जोर का झटका लगा है। नई नवेली पार्टी टीवीके ने DMK और AIDAMK को सत्ता से दूर करते हुए राज्य विधानसभा के चुनाव मे शानदार जीत हासिल की है। नतीजों के मुताबिक़ पहली बार इलेक्शन में उतरी थलापति विजय की टीवीके को 108 सीटें जबकि DMK को 59, AIDMK को 47 जबकि कांग्रेस समेत अन्य को 9 सीटें हासिल हुई है। सत्ताविरोधी लहर का आलम यह था कि, खुद मुख्यमंत्री स्टालिन और उनके कई मंत्री अपनी सीटें नहीं बचा पाएं।