Mardaani 3 Review: रानी की एक्टिंग ‘सुपरहिट’ पर कहानी में सस्पेंस ‘मिसिंग’, क्या माफिया अम्मा के खौफ को झेल पाएंगे आप?

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‘हर बार लड़कियां ही क्यों?’— इसी सवाल के साथ मर्दानी 3 एक बार फिर समाज के काले सच को सामने लाती है। रानी मुखर्जी दमदार पुलिस अफसर शिवानी शिवाजी राय के रूप में लौटती हैं, लेकिन क्या तीसरा पार्ट पहले जितना प्रभावी है? जानिए पूरा रिव्यू।

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  • Publish Date - January 30, 2026 / 07:09 PM IST,
    Updated On - January 30, 2026 / 07:09 PM IST

Mardaani 3 Review / Image Source : SCREENGRAB

HIGHLIGHTS
  • मेडिकल ट्रायल और ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर मुद्दे पर आधारित कहानी
  • रानी मुखर्जी की दमदार और भरोसेमंद एक्टिंग
  • सामाजिक संदेश के साथ सस्पेंस थ्रिलर का मिश्रण

एक छोटा सा सवाल… “हर बार लड़कियां ही क्यों?” जब फिल्म में पुलिस अफसर शिवानी शिवाजी राय यह सवाल पूछती हैं, तो सुनने वालों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। 2014 में शुरू हुई ‘मर्दानी’ अब अपने तीसरे हिस्से तक पहुँच गई है। मुद्दा इस बार भी बहुत बड़ा है, लेकिन क्या कहानी में उतना दम है? कहानी शुरू होती है बहादुर अफसर शिवानी शिवाजी राय से, जो लड़कियों की तस्करी (Human Trafficking) रोकने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। कहानी में मोड़ तब आता है जब तुर्कीए के भारतीय राजदूत की बेटी बुंदेलशहर से गायब हो जाती है। उसके साथ उनके नौकर की बेटी भी लापता है।

जांच करते-करते शिवानी पहुँचती है ‘अम्मा तक, जो भीख मंगवाने वाले गैंग की हेड है। लेकिन यहाँ खेल सिर्फ भीख का नहीं है, मासूम बच्चियों को नई दवाओं के खतरनाक टेस्ट (Medical Trials) के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या शिवानी इन बच्चियों को बचा पाएगी? फिल्म इसी बारे में है।

कैसी है फिल्म?

फिल्म की कहानी अच्छी है, लेकिन ‘मर्दानी’ के पहले दो पार्ट के मुकाबले थोड़ी कमज़ोर लगती है। Mardaani 3 Movie Review,  मुद्दा बहुत हटकर है दवाओं के टेस्ट के लिए बच्चियों को चूहों की तरह इस्तेमाल करना, जो देखकर गुस्सा भी आता है और दुख भी। डायरेक्टर अभिराज मिनावाला ने शिवानी को कोई सुपरहीरो नहीं, बल्कि एक असली पुलिसवाला दिखाया है। पर कमी यह है कि फिल्म में सस्पेंस कम है और आप पहले ही समझ जाते हैं कि आगे क्या होने वाला है। क्लाइमेक्स में किसी जोश भरे गाने की कमी भी खलती है।

कैसी है कलकारों की एक्टिंग ?

रानी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वो इस रोल के लिए ही बनी हैं। Mardaani 3 Rating उनका अंदाज़ और बातचीत का तरीका एकदम जबरदस्त है। विलेन ‘अम्मा’ के रोल में उन्होंने कमाल कर दिया है। वो इतनी क्रूर दिखी हैं कि रानी मुखर्जी को बराबर की टक्कर देती नजर आती हैं।प्रजेश कश्यप विलेन के रूप में अच्छे लगे हैं, लेकिन जीशू सेनगुप्ता जैसे बड़े एक्टर को फिल्म में बहुत कम समय दिया गया, जो थोड़ा अखरता है।

फिल्म की एडिटिंग अच्छी है, कहानी कहीं भी बोर नहीं करती। कैमरे का काम भी बढ़िया है, कई सीन बिना बोले ही सब कुछ कह जाते हैं। ‘मर्दानी 3’ समाज के एक बहुत ही काले सच को सामने लाती है। रानी मुखर्जी की बेहतरीन एक्टिंग के लिए यह फिल्म एक बार ज़रूर देखी जा सकती है। अगर आप सच्ची घटनाओं और सामाजिक मुद्दों वाली फिल्में पसंद करते हैं, तो यह आपके लिए है।

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मर्दानी 3 किस मुद्दे पर आधारित है?

फिल्म बच्चियों की तस्करी और अवैध मेडिकल ट्रायल जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाती है।

क्या मर्दानी 3 पहले दोनों पार्ट्स से बेहतर है?

विषय दमदार है, लेकिन कहानी और सस्पेंस के मामले में यह पहले दो पार्ट्स से थोड़ी कमजोर लगती है।

क्या यह फिल्म देखनी चाहिए?

अगर आप सामाजिक मुद्दों पर आधारित गंभीर फिल्में पसंद करते हैं और रानी मुखर्जी के फैन हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।