Ramanand Sagar Ramayan Facts : लाशों को कुर्सी पर बिठाकर दिखाई जाती थी रामायण! रामानंद सागर के शो से जुड़े वो चमत्कार, जिन्हें सुन कांप जाएगी आपकी रूह

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1987 में प्रसारित रामानंद सागर की रामायण सिर्फ एक टीवी शो नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक बन गई थी। इससे जुड़े कुछ ऐसे किस्से सामने आए, जिन्होंने लोगों को आज तक हैरान कर रखा है।

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  • Publish Date - April 9, 2026 / 05:41 PM IST,
    Updated On - April 9, 2026 / 05:41 PM IST

Ramanand Sagar Ramayan Facts / Image Source : x

HIGHLIGHTS
  • रामायण देखते हुए कथित तौर पर कोमा में पड़ा एक लड़का होश में आ गया।
  • धारावाहिक के समय सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था।
  • अंतिम यात्रा से पहले मृतकों को भी रामायण दिखाने की बातें सामने आईं।

एंटरटेनमेंट डेस्क : Ramanand Sagar दशकों पहले जब रामानंद सागर ने रामायण बनाने का फैसला लिया था, तब उन्होंने अपने बेटों से कहा था कि चाहे बंगला बेचना पड़ जाए, पर वह इस महाकाव्य को पर्दे पर उतार कर रहेंगे। 1987 में जब इसका प्रसारण शुरू हुआ, तो देश की रफ्तार थम जाती थी। सड़कें सूनी हो जाती थीं और लोग टीवी के सामने हाथ जोड़कर बैठ जाते थे। लेकिन इस दीवानगी के बीच कुछ ऐसे चमत्कार हुए, जिनका जिक्र रामानंद सागर की जीवनी An Epic Life: Ramanand Sagar में भी मिलता है।

Ramayan 1987 Show कोमा से जाग उठा 15 साल का लड़का

रामायण से जुड़ी एक घटना बॉम्बे के होली स्पिरिट अस्पताल की है। जहाँ एक 15 साल का लड़का कई दिनों से कोमा में था। डॉक्टर, मां और बहन सभी उसकी याददाश्त वापस लाने की कोशिश कर थक चुके थे। एक रविवार सुबह, अस्पताल के वार्ड में टीवी लगाया गया ताकि मरीज रामायण देख सकें। जैसे ही रामायण का एपिसोड शुरू हुआ, कोमा में पड़े उस लड़के के चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे।एपिसोड खत्म होते ही वह लड़का अचानक होश में आ गया। उसके पहले शब्द थे “क्या इंद्रजीत के बाण से बेहोश हुए लक्ष्मण जिंदा हैं?” यह देख डॉक्टर और परिजन सन्न रह गए। विज्ञान के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि जिस लड़के पर दवाइयां बेअसर थीं, उसे भगवान राम की गाथा ने कैसे पुनर्जीवन दे दिया।

लाशों को अंतिम बार दिखाई जाती थी ‘रामायण’

इस धारावाहिक के लिए श्रद्धा का आलम यह था कि यदि किसी की मृत्यु हो जाती, तो उसकी अंतिम यात्रा तक रोक दी जाती थी। किताब के अनुसार, शवों को पूरे आदर के साथ कुर्सी पर बिठाया जाता और उनकी आंखें खोलकर उन्हें अंतिम बार रामायण दिखाई जाती थी। माना जाता था कि प्रभु श्री राम के दर्शन से मृतक की आत्मा को शांति मिलेगी और सदगति का मार्ग आसान होगा।

आस्था और विज्ञान के बीच की कड़ी

रामानंद सागर ने जो चमत्कार पर्दे पर रचा, उसकी बराबरी आज की आधुनिक तकनीक वाली फिल्में भी नहीं कर पा रही हैं। आज रामानंद सागर के रामायण का जिक्र होते ही उन अनसुने किस्सों की यादें ताजा हो जाती हैं, जो आस्था और विज्ञान के बीच की कड़ी बन गए।

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