Gwalior White Topping Project : ग्वालियर नगर निगम का बड़ा एक्शन, डामर की सड़कों के टेंडर पर लगाई रोक, अब इस नई तकनीक से चमकेंगी शहर की राहें
ग्वालियर नगर निगम ने डामर सड़कों से छुटकारा दिलाने के लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत शहर की कई सड़कों को कंक्रीट में बदला जाएगा …

Gwalior White Topping Project :
- ग्वालियर नगर निगम ने डामर सड़कों के नए टेंडरों पर रोक लगाई
- शहर में व्हाइट टॉपिंग तकनीक से कंक्रीट सड़कें बनाई जा रही हैं
- धीमी रफ्तार के कारण धूल और गड्ढों से लोगों की परेशानी बढ़ी
ग्वालियर : Gwalior White Topping Project मध्य प्रदेश के ग्वालियर नगर निगम ने सालों से बारिश में उखड़ने वाली डामर की सड़कों से शहर की जनता को आजादी देने जा रहा है। निगम ने अब शहर की फोरलेन, टू-लेन और सिंगल-लेन सड़कों को ऑल वेदर यानी हर मौसम के अनुकूल बनाने के लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक अपनाने का फैसला किया है। इसके लिए बाकायदा डामर की सड़कों के नए टेंडरों पर रोक लगा दी गई है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि जिन सड़कों पर काम शुरू हुआ है, उनकी कछुआ चाल ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। उड़ती धूल और गड्ढों के कारण वीसी बंगले से लेकर एजी ऑफिस तक का सफर आम जनता के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
पैचवर्क से तंग आकर निगम ने लिया बड़ा फैसला
ग्वालियर नगर निगम अब डामर की सड़कों को हमेशा के लिए बाय-बाय कहने की तैयारी में है। मानसून के दौरान अक्सर उखड़ने वाली और गड्ढों में तब्दील होने वाली डामर की सड़कों के पैचवर्क से तंग आकर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। शहर के अंदर मौजूद करीब 2500 किलोमीटर से ज्यादा डामर की सड़कों को अब धीरे-धीरे व्हाइट टॉपिंग यानी कंक्रीट की मजबूत सड़कों में बदला जाएगा। इसके लिए निगम ने 30 अप्रैल के बाद से डामर की सड़कों के नए टेंडर लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
Gwalior Smart City News कागजों पर शानदार, जमीनी हकीकत दर्दनाक
निगम का यह विजन कागजों पर और भविष्य के लिहाज से जितना शानदार है, वर्तमान में इसकी जमीनी हकीकत उतनी ही दर्दनाक है। नगर निगम, स्मार्ट सिटी और पीडब्ल्यूडी द्वारा शुरू किए गए व्हाइट टॉपिंग प्रोजेक्ट की सुस्त रफ्तार ने शहर का दम घोंट दिया है। सचिन तेंदुलकर मार्ग, वीसी बंगले से सिरौल और विक्की फैक्ट्री से एजी ऑफिस तक की सड़कें आज धूल के गुबार और गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। दिनभर उड़ती धूल से सांस लेना दूभर है और लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि लोगों को महज कुछ मीटर के सफर के लिए 2 से 3 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है।
ग्वालियर में व्हाइट टॉपिंग प्रोजेक्ट की स्थिति
पहले फेज में निगम ने सर्वे के बाद ग्वालियर पूर्व और ग्वालियर विधानसभा की 18 सड़कों को इसके लिए चुना है। करीब 15 किलोमीटर लंबी इन 18 सड़कों को चमकाने के लिए 75 करोड़ रुपये का बजट आंका गया है, जिसमें से 7 सड़कों के लिए 39 करोड़ के टेंडर जारी भी किए जा चुके हैं।
Madhya Pradesh Road Construction सड़कें बनने के बाद सड़क टूटने की समस्या खत्म
अफसरों का दावा है कि कंक्रीट की ये सड़कें बनने के बाद बारिश में बार-बार सड़क टूटने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। बहरहाल तकनीक नई है और इरादे भी नेक हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने ग्वालियर की जनता के सब्र का इम्तिहान ले लिया है। अब देखना होगा कि डामर को अलविदा कहने वाला ग्वालियर नगर निगम, इन व्हाइट टॉपिंग सड़कों को तय वक्त पर पूरा कर जनता को इस अग्निपरीक्षा से कब तक मुक्ति दिला पाता है।
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लेखक के बारे में
I’m Sneha Singh, a journalist and news producer at IBC24. A Gold Medalist in Journalism and Mass Communication, I specialize in news production, content writing, and digital storytelling. With a keen interest in political and crime reporting, I believe in delivering accurate, ethical, and impactful journalism that informs and connects with people.
और भी पढ़ें...Web Title: Gwalior Municipal Corporation Shifts to White Topping Roads, Bans New Asphalt Tenders Amid Slow Progress Concerns
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