मप्र में 2026 ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा, किसान कल्याण पर ध्यान केंद्रित होगा: राज्यपाल

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मप्र में 2026 ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा, किसान कल्याण पर ध्यान केंद्रित होगा: राज्यपाल

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 02:32 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 02:32 PM IST

भोपाल, 26 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र के लिए बजट बढ़ाकर 27,000 करोड़ रुपये किए जाने का उल्लेख करते हुए सोमवार को कहा कि राज्य में 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा।

पटेल राज्य की राजधानी में 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है। 2026 को मध्यप्रदेश में ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा और इसकी तैयारियां पहले से ही जारी हैं।’’

राज्यपाल ने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए बजट 2002-03 में 600 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 27,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि ‘समृद्ध किसान-समृद्ध राज्य’ के लक्ष्य के तहत कृषि विकास का बहुआयामी मॉडल अपनाया गया है, जिसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, आय वृद्धि, प्राकृतिक खेती, विपणन और निर्यात, नवाचार और डिजिटल पारदर्शिता सहित 10 गतिविधियां शामिल हैं और इन्हें जल्द ही पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य की 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू की गई है और 40 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है।

पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश की दुग्ध राजधानी बनाने और पशुपालन को लाभदायक व्यवसाय में बदलने के लिए बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निराश्रित मवेशियों के लिए गौशालाओं में प्रति पशु अनुदान 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया गया है और इसके लिए बजट प्रावधान 250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 505 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश के योगदान को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक साबित होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य में कम से कम 1,200 नयी दुग्ध सहकारी समितियां बनाई गई हैं और खरीद मूल्य 2.50 रुपये से बढ़ाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर किया जा रहा है।

पटेल ने कहा कि सरकार गरीब परिवारों को आवास और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 11 लाख से अधिक घरों को मंजूरी दी गई थी, जिनमें से चार लाख पूरे हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग 5.25 लाख घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा है और मुख्यमंत्री माजरा-टोला योजना के तहत लगभग 20,000 बस्तियों को सड़कों से जोड़ने के लिए 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी गई है।

पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत 24 जिलों में 55 सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है।

राज्यपाल ने स्कूली शिक्षा को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला और बताया कि 2024-25 में प्राथमिक स्तर पर ‘ड्रॉपआउट’ दर 6 प्रतिशत से घटकर शून्य हो गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 8.5 लाख छात्रों की शिक्षा के लिए भुगतान कर रही है जबकि राज्य में 369 सांदीपनि स्कूल स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 107 भवन पूरे हो चुके हैं, और 154 भवन मार्च तक बन जाएंगे।

पटेल ने कहा कि कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले कुल 94,234 छात्रों को 25,000 रुपये के लैपटॉप दिए गए हैं।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि शिवपुरी में माधव राष्ट्रीय उद्यान को नौवां बाघ अभयारण्य घोषित किया गया है और सरकार ने सागर जिले में डॉ. भीमराव अभयारण्य तथा श्योपुर जिले में जहांगीर अभयारण्य की भी स्थापना की है।

पटेल ने कहा कि नौरादेही अभयारण्य को चीतों के लिए तीसरे आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला है बल्कि निवासियों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।

राज्य में निवेश और औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए पटेल ने कहा कि सरकार ने औद्योगिक विकास में तेजी लाने के लिए कानूनों को सरल बनाया है और अनावश्यक नियमों को हटा दिया है।

उन्होंने कहा कि जन विश्वास अधिनियम 2024 और 2025 और विनियमन ने मध्यप्रदेश में व्यापार करने में आसानी और उद्योग स्थापित करना सुनिश्चित किया है।

राज्यपाल ने पारंपरिक परेड का निरीक्षण किया और राज्य की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली विभिन्न विभागों की झांकियों को देखा।

संभागीय और जिला मुख्यालयों में भी गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने गृहनगर उज्जैन में जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने इंदौर में तिरंगा फहराया।

भाषा ब्रजेन्द्र मनीषा नेत्रपाल

नेत्रपाल