शह मात The Big Debate: मौत की शराब… कौन देगा जवाब? मध्यप्रदेश के सागर में 21 लोगों की मौत, अपनों को खो चुके लोगों को कितनी तसल्ली दे पाएगा मुआवजे का मरहम

मौत की शराब... कौन देगा जवाब? मध्यप्रदेश के सागर में 21 लोगों की मौत, 21 people died in Sagar Madhya Pradesh

शह मात The Big Debate: मौत की शराब… कौन देगा जवाब? मध्यप्रदेश के सागर में 21 लोगों की मौत, अपनों को खो चुके लोगों को कितनी तसल्ली दे पाएगा मुआवजे का मरहम
Modified Date: September 8, 2026 / 12:10 am IST
Published Date: September 7, 2026 11:33 pm IST

सागरः Sagar Madhya Pradesh मध्य प्रदेश के सागर में ज़हरीली शराब से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। सौ से ज्यादा लोग अब भी ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पाटन, नौराज, डिलोना, बमूरा, हिनौती और गूगराखुर्द ये गांव हॉट स्पॉट हैं, जहां सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। इस घटना ने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सिस्टम के ज़िम्मेदारों के पास यूं भी हादसों के बाद कहने को बहुत कुछ होता नहीं.. वही रटी-रटाई तीन चार लाईनें। ऐसे हर हादसों के बाद बोली जाती हैं।

Sagar Madhya Pradesh छिंदवाड़ा कप सीरप, इंदौर दूषित पानी और बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के बाद जहरीली शराब का ये मामला विपक्ष को तश्तरी में परोस कर मिला है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सरकार पर सवाल तो खड़े कर ही रहे हैं लेकिन अपनी सियासी सुविधा से उसे एंगल भी दे रहे हैं कि हर जगह मरने वाले हिंदू थे यानी भाजपा के राज में हिंदू खतरे में हैं।

विपक्ष के आरोप और सरकार की कैफियत अपनी जगह है, लेकिन सवाल ये है कि क्या अपने फायदे के लिए लोगों की जान ले लेना हत्या के बराबर अपराध नहीं है? तय दुकानों को छोड़कर गांव-गांव शराब बिकना क्या बिना प्रशासन की शह के संभव है? मुरैना में अवैध शराब से मौतों के बाद हटाए गए एसपी अभी सागर के एसपी हैं, ये क्या किसी संयोग की तरफ इशारा नहीं करता? सबसे बड़ा सवाल ये कि मुआवजे का मरहम अपनों को खो चुके लोगों को कितनी तसल्ली दे पाएगा?


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।