पेयजल त्रासदी और जल संकट के बाद इंदौर में जल नीति बनाने की घोषणा
पेयजल त्रासदी और जल संकट के बाद इंदौर में जल नीति बनाने की घोषणा
इंदौर (मध्यप्रदेश), चार जून (भाषा) देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत और गर्मियों के दौरान जल संकट से सबक लेते हुए नगर निगम ने बृहस्पतिवार को जल नीति बनाने की घोषणा की।
अधिकारियों ने कहा कि यह राज्य में संभवतः पहला मामला है, जब किसी नगर निगम ने अपने स्तर पर जल नीति बनाने का फैसला किया हो।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने संवाददाताओं से कहा,‘‘हम शहर की जल नीति बनाएंगे। यह नीति जल के सदुपयोग और जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर बनाई जाएगी। इस नीति में पेयजल से जुड़े मामलों में गड़बड़ियों पर संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाने का प्रावधान भी रहेगा।’’
महापौर के मुताबिक इस वर्ष भीषण गर्मी के कारण शहर के कई नलकूप सूख गए हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को चुनौती के रूप में लेते हुए नगर निगम आने वाले दिनों में जल संरक्षण के प्रयास तेज करेगा।
भार्गव ने कहा कि जल संकट गहराने की स्थिति में नगर निगम निजी क्षेत्र के नलकूपों और अन्य जल स्रोतों के सार्वजनिक उपयोग पर भी विचार करेगा।
इंदौर, अपनी पेयजल जरूरतों के लिए मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर निर्भर है।
नगर निगम की पाइपलाइन के जरिये नर्मदा का पानी पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद से करीब 80 किलोमीटर दूर इंदौर लाकर शहर भर में पहुंचाया जाता है।
कांग्रेस ने हाल में दावा किया कि इंदौर में पेयजल के 240 नमूनों में से करीब 98 प्रतिशत नमूने जांच में दूषित पाए गए हैं और इनमें डायरिया जैसी बीमारियां फैलाने वाले रोगाणु मिले हैं।
स्थानीय प्रशासन ने प्रमुख विपक्षी दल के इस दावे को ‘भ्रामक’ बताकर खारिज किया।
इससे पहले, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के दौरान दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप में कई लोगों की मौत हो गई थी।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि दूषित पेयजल के कारण इस इलाके में 36 लोगों की मौत हुई।
हालांकि, इस मामले पर मध्यप्रदेश विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को चर्चा के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई।
भागीरथपुरा की पेयजल त्रासदी की न्यायिक जांच मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग कर रहा है। उच्च न्यायालय ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए 14 जून तक की मोहलत दी है।
भाषा हर्ष राजकुमार
राजकुमार

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