शह मात The Big Debate: नमाज Vs हनुमान चालीसा.. धार में विवाद जारी!… फिर आमने-सामने आए हिंदू और मुस्लिम पक्ष, क्या धार में फिर बढ़ेगा तनाव?

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Bhojshala Controversy News: धार की भोजशाला में एक तरफ नमाज और दूसरी तरफ हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद तनाव बढ़ गया है।

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 11:24 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 11:28 PM IST

Bhojshala Controversy News/Image Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • 15 मई को एमपी हाईकोर्ट ने फैसला हिंदू पक्ष में दिया और ये कह दिया कि भोजशाला मंदिर है।
  • प्रशासन ने मुस्लिम पक्ष को भी भोजशाला के पास नमाज पढ़ने के लिए जमीन दी है।
  • हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला के इतने पास नमाज हुई तो ये जगह अपवित्र हो जाएगी।

Bhojshala Controversy News: भोपाल: धार की भोजशाला में एक तरफ नमाज और दूसरी तरफ हनुमान चालीसा का पाठ। तस्वीरों को देखकर इसे सर्वधर्म समभाव की बानगी मत समझ लीजियेगा। दरअसल ये तनाव की स्थिति है, 15 मई को एमपी हाईकोर्ट ने फैसला हिंदू पक्ष में दिया और ये कह दिया कि भोजशाला मंदिर है। मगर साथ ही ये भी निर्देश दिए कि मुस्लिम पक्ष को भी पास ही कोई उचित जगह नमाज के लिए दी जाए। प्रशासन ने नमाज के लिए जमीन दे भी दी। मगर अब हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला के इतने पास नमाज हुई तो ये जगह अपवित्र हो जाएगी।

फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट गया और जब वहां से भी फौरी राहत नहीं मिली तो उसने प्रशासन के बताए हुए स्थान पर नमाज शुरू कर दी। (Bhojshala Controversy News) अब टकराव की आशंका के बारे में अभी तो मुस्लिम पक्ष मौन है लेकिन प्रशासन को एक बार फिर से हर शुक्रवार को अपनी सांसे संयत रखने में पसीने आ रहे हैं।

Bhojshala Controversy News: इस मामले पर कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबको सम्मान करना चाहिए। वहीं भाजपा ने भी साफ कहा कि यदि कोई किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम करेगा, तो उनसे निपटने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था सक्षम है।

यानी ये कह सकते हैं कि भले ही कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुना दिया हो लेकिन भोजशाला में स्थाई शांति अभी तक स्थापित नहीं हो पाई? (Bhojshala Controversy News) सवाल ये है कि जब मुस्लिम पक्ष को जगह देने के लिए कोर्ट ने ही कहा है तो फिर हिंदू पक्ष की जिद के मायने क्या हैं? सवाल पूजा उपासना पर नहीं है लेकिन एक ही दिन अज़ान और शंख की आवाज़ों से क्या दो समुदायों की शांति तो नहीं बाधित होगी?

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