Bhojshala Dispute High Court/Image Source: Social Media
Bhojshala Dispute High Court: धार स्थित भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोड़ आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जारी सुनवाई के दौरान जैन समाज द्वारा दायर याचिका ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। जैन समाज ने दावा किया है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर रही है यहां प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और मंदिर थे।
जैन समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखा। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और प्राचीन ग्रंथों का हवाला देते हुए दावा किया कि राजा भोज ने भोजशाला की भूमि जैन आचार्य मानतुंग को दान में दी थी। अदालत ने जैन समाज की जनहित याचिका को भोजशाला विवाद में पहले से लंबित मुख्य याचिका के साथ टैग कर दिया है।
जैन समाज की ओर से पक्ष रख रहीं अधिवक्ता प्रिया जैन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की हालिया सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए बताया कि सर्वे के दौरान जैन तीर्थंकरों और यक्ष-यक्षणियों की कई खंडित मूर्तियां पाई गई हैं, लेकिन एएसआई ने रिपोर्ट में इन अवशेषों को जैन धर्म से स्पष्ट रूप से जोड़कर नहीं दर्शाया। प्रिया जैन ने कहा कि सर्वे में सात फणों वाली संरचना के अवशेष मिले हैं, जो जैन प्रतीक चिन्हों से मेल खाते हैं। जैन समाज का दावा है कि ये सब तथ्य भोजशाला के जैन इतिहास की ओर इशारा करते हैं।
जैन समाज ने अदालत से भोजशाला में पूजा-अर्चना के समान अधिकार देने की मांग की है। अब इस मामले में अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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