शह मात The Big Debate: मेट्रो रुट पर ‘महाभारत’! मुस्लिम समाज ने खोला मोर्चा, क्या प्रोजेक्ट पर भी पड़ेगी हिंदू-मुस्लिम सियासत की छाया?

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Bhopal Metro Route Controversy: भोपाल की रफ़्तार को नई पहचान देने वाली मेट्रो अब विवादों के ट्रैक पर फंसती नज़र आ रही है।

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 11:38 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 11:59 PM IST

Bhopal Metro Route Controversy/Image Credit: IBC24.In

HIGHLIGHTS
  • भोपाल की रफ़्तार को नई पहचान देने वाली मेट्रो अब विवादों के ट्रैक पर फंसती नज़र आ रही है।
  • राजधानी के पुराने शहर में अंडरग्राउंड मेट्रो रूट को लेकर घमासान छिड़ गया है।
  • मुस्लिम समाज ने मेट्रो रूट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

Bhopal Metro Route Controversy: भोपाल: भोपाल की रफ़्तार को नई पहचान देने वाली मेट्रो अब विवादों के ट्रैक पर फंसती नज़र आ रही है। राजधानी के पुराने शहर में अंडरग्राउंड मेट्रो रूट को लेकर घमासान छिड़ गया है। विरोध की गूंज ‘बड़ा बाग कब्रिस्तान’ से उठी है, जहां मुस्लिम समाज ने मेट्रो रूट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

हाथों में तख्तियां, नारेबाजी करते मुस्लिम समाज के ये लोग भोपाल अंडर ग्राउंड मेट्रो रूट के विरोध में उतर चुके हैं। जिसे लेकर मध्यप्रदेश में सियासी रार छिड़ गई है। दरअसल, भोपाल मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का अंडरग्राउंड कॉरिडोर पुराने शहर के कई इलाकों से होकर गुजरने वाला है और इसी रूट में बड़ा बाग कब्रिस्तान आता है। (Bhopal Metro Route Controversy) इसी के चलते मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने मोर्चा खोल दिया, ये लोग कह रहे हैं कि इससे हमारे पुरखे यहाँ दफ़्न हैं। रूट बनने से उनकी कब्रों का नुकसान हो सकता है। विरोध के बीच मामला वक्फ़ बोर्ड ट्रिब्यूनल तक जा पहुँचा। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल कह रहे हैं कि मेट्रो जरूरत है।इसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन कोशिश करेंगे कि- किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचे।

कांग्रेस यूँ तो फ़ौरन ऐसे मसले में दूसरे पक्ष के साथ खड़ी हो जाती है, लेकिन इस मसले में कांग्रेस ने सधे लहजे में कहा कि- संवाद के माध्यम से हर समस्या हल निकाला जा सकता है।

Bhopal Metro Route Controversy: कांग्रेस जहां सरकार को बातचीत करने की नसीहत दे रही है, तो बीजेपी आक्रामक नजर आई। (Bhopal Metro Route Controversy) बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि- मेट्रो का रूट तो बदलेगा नहीं। इसका विरोध कर रहे लोग छाती पीटना बंद करें। जब दिल्ली में जामा मस्जिद के नीचे से मेट्रो निकल गई तो यहाँ फ़िज़ूल का विवाद क्यूँ खड़ा किया जा रहा है?

वैसे इसमें कोई दो राय नहीं है कि मेट्रो की लाइन- 20 से 30 फीट नीचे होगी, जबकि कब्र की अधिकतम गहराई 10 फीट होगी। ऐसे में संभावना कम है कि कब्रों को कोई नुकसान हो? ऐसे में सवाल ये कि- क्या ये सिर्फ आशंकाओं से उपजा हुआ विरोध है या इसके पीछे कोई सियासत है? (Bhopal Metro Route Controversy) सवाल मेट्रो के निर्माण में लगी कंपनियों पर भी कि- वो एक बैठक करके सारी शंकाओं का समाधान क्यूँ नहीं कर देती? और सवाल ये कि वक्फ़ बोर्ड क्यों इस मामले को बड़ा होने का मौक़ा दे रहा है?

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