MP Samvida Empolyees Latest News: संविदा कर्मियों को भी मिलेगा नियमित सरकारी कर्मचारियों का वाला पूरा लाभ!.. हाईकोर्ट ने सरकार को दिया ये बड़ा आदेश, पढ़ें
MP High Court Big Decision on Samvida Empolyees: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों को राहत देते हुए वर्गीकरण कर उन्हें वेतन और सेवा संबंधी सभी लाभ देने के निर्देश दिए।
MP High Court Big Decision on Samvida Empolyees
- हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों को वेतन और सेवा संबंधी लाभ देने का आदेश दिया।
- लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को कम वेतन देना अनुचित बताया।
- सरकार को कर्मचारियों का वर्गीकरण कर सभी लाभ देने के निर्देश।
भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट राज्य के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के पक्ष में आदेश जारी करते हुए उन्हें बड़ी राहत प्रदान की है। उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि राज्य सरकार द्वारा लंबे समय से कार्यरत संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारियों को नियमितीकरण नीति के लाभ से बाहर रखना तर्कहीन है। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि ऐसे कर्मचारियों का उचित वर्गीकरण कर उन्हें वेतन और सेवा संबंधी सभी लाभ प्रदान किए जाएं। (MP High Court Big Decision on Samvida Empolyees) जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा कि यदि राज्य सरकार किसी कर्मचारी की सेवाएं लगातार ले रही है, तो उसे कम वेतन देकर उसके जीवनयापन के अधिकार और आर्थिक न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा कि यदि राज्य सरकार किसी कर्मचारी की सेवाएं लगातार ले रही है, तो उसे कम वेतन देकर उसके जीवनयापन के अधिकार और आर्थिक न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
क्या है संविदा कर्मियों से जुड़ा पूरा मामला?
दरअसल याचिकाकर्ताओं ने पिछले दिनों रिट याचिका दायर कर यह मांग की थी कि उन्हें स्थायी दर्जा प्रदान किया जाए। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्हें वर्ष 2009 में संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और तब से लगातार उनकी सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान लाभ नहीं दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा उन्हें वर्गीकृत न करना और कम वेतन देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
राज्य सरकार की क्या हैं दलीलें?
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2016 में एक नीति बनाई गई थी, जिसके तहत दैनिक वेतनभोगियों को ‘कुशल’, ‘अर्ध-कुशल’ और ‘अकुशल’ श्रेणियों में वर्गीकृत कर लाभ दिए जाते हैं। हालांकि, यह लाभ संविदा, आउटसोर्स या अस्थायी कर्मचारियों पर लागू नहीं होता। (MP High Court Big Decision on Samvida Empolyees) हालांकि अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता लगभग 16 वर्षों से लगातार कार्यरत हैं और उनकी सेवाएं समय-समय पर बढ़ाई जाती रही हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो वर्गीकृत किया गया और न ही स्थायी दर्जे के लाभ दिए गए।
अदालत ने यह भी कहा कि राज्य की यह नीति उन कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन और उचित वेतन सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है, जिन्हें नियमित नहीं किया जा सकता। यह नीति संविधान के अनुच्छेद 38, 39 और 43 में निहित सामाजिक और आर्थिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं का 07.10.2016 के परिपत्र के अनुसार वर्गीकरण किया जाए और उन्हें संबंधित वेतनमान सहित सभी लाभ प्रदान किए जाएं।
MP के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत
https://t.co/p2oxB75O1r— IBC24 News (@IBC24News) April 21, 2026
इन्हें भी पढ़ें:-
नकली मौनजारो इंजेक्शन मामला: फार्मा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एली लिली ने कार्रवाई का स्वागत किया
द्रमुक शासन के अंतर्गत तमिलनाडु में कानून व्यवस्था बिगड़ रही है: मुख्यमंत्री नायडू
अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हमले की धमकी देने वाले को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
चक्करपुर भूखंड मामले में उच्चतम न्यायालय का हरियाणा के अधिकारियों को नोटिस
सामने आने वाले हर अवसर में से हमेशा बेहतर विकल्प चुनने की कोशिश की: कृतिका कामरा
घुसपैठियों से मुक्त पश्चिम बंगाल में हर साल युवाओं को एक लाख नौकरियां मुहैया कराएगी भाजपा : शाह

Facebook


