भोपाल :शह मात The Big Debate : सेना में आपने सिख, गोरखा जाट रेजिमेंट सुनी होगी..उसी तर्ज़ पर एमपी सरकार पुलिस में भी बैगा, सहरिया, भारिया और दूसरे आदिवासी समाज की बटालियन बनाने जा रही है। एमपी की 47 सीटें जनजातीय समाज के लिए रिजर्व हैं और वो BJP के लिए बड़ा चैलेंज हर चुनाव में रहती ही हैं। दूसरा इन बटालियन में युवा ही भर्ती होंगे तो एक तरह से वे जेन जी के ग़ुस्से को भी डायलूट कर सकेंगे। हालांकि तय है कि घोषित तौर पर तो कहा यही जाएगा कि हम हमेशा से आदिवासियों के उन्नयन के लिए काम करते हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस कह रही है कि 25 सालों में सत्ता में रहने वाली भाजपा सरकार को अभी तक जनजातियों की सुध नहीं आई फिर अचानक ये बटालियन बनाने का ख़याल कैसे आया? सबसे ज्यादा आदिवासियों पर अत्याचार मप्र में होते है, ये आदिवासियों को प्रलोभन दे रहे है लेकिन आदिवासी इनके बहकावे में नहीं आने वाले हैं
इसमें कोई दो राय नहीं है कि ऐसी बटालियन बनने से जनजातीय समाज के युवाओं को सरकारी नौकरी तो मिलेगी और ये सत्ता पक्ष के के खाते में जाएगा। मग सवाल ये भी है कि पुलिस में ऐसी भर्तियों से क्या बाकी के समाज के युवाओं के मन में असंतोष नहीं पनपेगा? सवाल ये कि जनजातीय बहुल सीटों में बाय डिफॉल्ट पकड बनाई हुई कांग्रेस क्या इससे कमज़ोर होगी? सवाल ये भी क्या भाजपा इस कदम के बाद अपने “वीकर सेक्शन” कहे जाने वाले ट्राइबल वोट बैंक को साध लेगी।
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