शह मात The Big Debate: पहले IAS संतोष वर्मा… फिर बरैया… अब आरडी प्रजापति! सनातन पर हमले का एक सा पैटर्न… उकसावे के राजनीति के प्रायोजक कौन?
RD Prajapati Controversy: पहले IAS संतोष वर्मा... फिर बरैया... अब आरडी प्रजापति! सनातन पर हमले का एक सा पैटर्न... उकसावे के राजनीति के प्रायोजक कौन?
RD Prajapati Controversy/Image Source: IBC24
- भोपाल में बयानबाज़ी बम
- सनातन पर फिर हमला
- आरडी प्रजापति के बयान से मचा बवाल
RD Prajapati Controversy: पहले IAS संतोष वर्मा, फिर कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया… और अब बीजेपी के पूर्व विधायक व वर्तमान सपा नेता आर.डी. प्रजापति। एक के बाद एक सनातनी आस्था और हिंदू धर्म के खिलाफ बयानबाज़ी के मामले सामने आ रहे हैं। दरअसल, भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान सपा के पूर्व विधायक आर.डी. प्रजापति ने कथावाचकों को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और भाषा की सारी मर्यादाएं लांघ दीं।
RD Prajapati Controversy: आर.डी. प्रजापति के इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि सनातन और महिलाओं का अपमान करना समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की आदत में शुमार है। सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सनातन-विरोधी मानसिकता अब खुलकर सामने आ रही है। मंत्री ने कहा कि आर.डी. प्रजापति ने एक धर्माचार्य की माता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है और अब प्रियंका गांधी भी बयान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और सनातन का अपमान करना विपक्ष की आदत बन चुका है।
RD Prajapati Controversy: बीजेपी की घेराबंदी के बाद समाजवादी पार्टी बैकफुट पर नजर आई और पार्टी ने आर.डी. प्रजापति के बयान से खुद को अलग कर लिया। वहीं कांग्रेस ने भी दो टूक कहा कि इस तरह की नकारात्मक सोच से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। आर.डी. प्रजापति के बयान पर जीतू पटवारी ने कहा कि यदि ऐसा कोई भी मुद्दा सामने आता है, तो कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मानना है कि समाज में सभ्यता, संस्कार और महिलाओं के प्रति आदर होना चाहिए। किसी भी धर्म के लिए कार्य करने वालों के प्रति कांग्रेस सम्मान का भाव रखती है। उन्होंने साफ कहा कि नकारात्मक और नेगेटिव सोच से कांग्रेस पार्टी का कोई संबंध नहीं है।
RD Prajapati Controversy: कुल मिलाकर, विभाजनकारी और जहरीले बयानों के बाद निंदा की राजनीति जारी है। लेकिन जिस तरह से कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा लगातार सनातनी आस्था और हिंदू समाज को निशाना बनाया जा रहा है, उस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बजाय केवल निंदा तक सीमित रहना कई संदेह पैदा करता है। क्या इन बयानों के पीछे कोई खास पैटर्न है? आखिर बार-बार निशाने पर सनातन ही क्यों? क्या इसके पीछे कोई बड़ी फंडिंग है, जो समाज को दलित बनाम सवर्ण या “हम हिंदू नहीं हैं” जैसे अभियानों के जरिए बांटने का प्रयास कर रही है? और सबसे बड़ा सवाल- सरकार और प्रशासन की ऐसी क्या मजबूरी है कि इन जहरीले बयान देने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो रही?


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