शह मात The Big Debate: ‘रेत’ पर सुप्रीम फटकार, कब चेतेंगे जिम्मेदार? बंदूक का राज खत्म करने चंबल में उतरेगी CRPF, क्या अब टूटेगा अवैध खनन का खेल?

Supreme Court on Illegal Mining: मुरैना में वन रक्षक की हत्या और चंबल का सीना छलनी करते रेत माफिया अब सुप्रीम कोर्ट के रडार पर हैं।

शह मात The Big Debate: ‘रेत’ पर सुप्रीम फटकार, कब चेतेंगे जिम्मेदार? बंदूक का राज खत्म करने चंबल में उतरेगी CRPF, क्या अब टूटेगा अवैध खनन का खेल?

Supreme Court on Illegal Mining/ Image Source- IBC24

Modified Date: April 18, 2026 / 11:38 pm IST
Published Date: April 18, 2026 11:38 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मध्य प्रदेश के रेत माफिया अब सुप्रीम कोर्ट के रडार पर हैं।
  • एक सप्ताह के अंदर दो बार सुप्रीम कोर्ट की एमपी में अवैध माइनिंग को लेकर टिप्पणी की गई है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा - चंबल में बंदूक का राज खत्म करने के लिए CRPF उतरेगी।

Supreme Court on Illegal Mining: भोपाल: मुरैना में वन रक्षक की हत्या और चंबल का सीना छलनी करते रेत माफिया अब सुप्रीम कोर्ट के रडार पर हैं। एक सप्ताह के अंदर दो बार सुप्रीम कोर्ट की एमपी में अवैध माइनिंग को लेकर की गई तल्ख़ टिप्पणी ये दर्शाती है कि कोर्ट माफिया के आगे प्रशासन की बेबसी या मिलीभगत को समझ चुका है। 13 अप्रैल को इस पुल की नींव माफ़िया के पूरी तरह खोद दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट इतना नाराज़ हुआ कि, उसने सरकार से पूछा कि अगर पुल गिरा तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सब सरकार की नाक के नीचे हो रहा है और आपके पास रोकने के साधन ही नहीं हैं तो राज्य सरकार का अस्तित्व क्यों है? 18 अप्रैल को सरकार के जवाब से नाराज़ कोर्ट ने कहा कि अगर माफिया नहीं रुके, तो चंबल में बंदूक का राज खत्म करने के लिए CRPF उतरेगी। (Supreme Court on Illegal Mining) भाजपा सर्वोच्च्च अदालत पर तो टिप्पणी नहीं कर रही है लेकिन बचाव में तर्क दे रही है कि सरकारी लोग माफिया से जूझते ही नज़र आ रहे हैं, समझौता नहीं कर रहे हैं।

कांग्रेस भले सर्वोच्च अदालत से मिली सरकार को फटकार को लेकर खुश है लेकिन चंबल को छलनी करने में इनके नेताओं की भी भागीदारी कम नहीं है। हालांकि कांग्रेस कह रही है कि जब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर मुहर लगा रही है इन तीनों सरकारों से रेत माफिया सम्भल नहीं रहा है। (Supreme Court on Illegal Mining)  इसका मतलब तीनों सरकार भ्रष्ट है,कानून व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है।

सवाल अब इन तस्वीरों पर है। घड़ियाल सेंचुरी के आस-पास सैकड़ों की तादात में रेत खनन करती इन गाड़ियों को किसका संरक्षण है। (Supreme Court on Illegal Mining) चंबल नदी की ऐसी दुर्दशा क्या वाकई लोकल नेताओं के संरक्षण में नहीं हो रही है। क्या सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद इन पर अंकुश लगेगा? जिस तरह से यहाँ का माफिया बैखौफ़ होकर सरकारी लोगों को मार डालता है,उसे देखकर तो भरोसा नहीं होता।

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