IBC24 Janjatiya Pragya: ‘धर्मान्तरण कराने वाले हमारे आदिवासी संस्कृति के विरोधी है’.. IBC24 के मंच से सीएम मोहन यादव का बड़ा बयान, कहा- वे करते हैं राष्ट्रांतरण की बात

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IBC24 Janjatiya Pragya: 'धर्मान्तरण कराने वाले हमारे आदिवासी संस्कृति के विरोधी है'.. IBC24 के मंच से सीएम मोहन यादव का बड़ा बयान, कहा- वे करते हैं राष्ट्रांतरण की बात

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  • Publish Date - December 2, 2025 / 08:25 PM IST,
    Updated On - December 21, 2025 / 11:07 PM IST

IBC24 Janjatiya Pragya

भोपाल: IBC24 Janjatiya Pragya मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर IBC24 द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम “जनजातीय प्रज्ञा” का आगाज़ हो चुका है। इस महत्वपूर्ण मंच पर राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं, अब तक की उपलब्धियों, और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत संवाद किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में संगठन के शिल्पी सेगमेंट अंतर्गत मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव शामिल हुए। उन्होंने सरकार के कामों को लेकर IBC24 की ओर से किए गए सवालों का जवाब दिया।

IBC24 Janjatiya Pragya IBC24 के मंच से सीएम मोहन यादव का बड़ा बयान

भगवान कृष्ण की परंपरा को जनजाति समाज ने जितने अच्छे ढंग से अपनाया है। इतना तो किसी ने अपनाया ही नहीं है। कोई सा भी उनका पैरवास देख लो। उसमें मोर पंख मिलता है कि नहीं मिलता है? यह गोपाल कृष्ण का कितना बड़ा प्रेम है। आप बताइए कोई वाद्य ले लो। आपको बांसुरी और मुरली में फर्क है मालूम है? ट्राइबल बेल्ट की बात करते हैं तो वो कहते हैं बांसुरी बजाते हैं। बांसुरी नहीं बजाते हैं। सच्चे अर्थों में मुरली बजाते हैं। आदिवासी भाई बहन हमारे सब अपने उनके मुंह पे देख मुरली और बांसुरी में फर्क ये है। मुरली अधर पे बजती है। उसको मुंह भी झूठा नहीं करना पड़ता है। ये पवित्रता है। अपनी सांस की रिदमम है। योग से अपनी क्षमता बढ़ाने की विधा है और वो मस्त तरीके से और कितनी बड़ी-बड़ी मुरलियां इतना दम भी चाहिए। हमें गर्व है हमारे आदिवासी भाई बहनों पर जो उसका आनंद लेते हैं। अब ये अंदर फूंक के बजाना वो बांसुरी होती है। तो मैं मान के चलता हूं तो भगवान कृष्ण की बात को तो आगे बढ़ाया। अब आप वहां आ जाओ जहां से आपने किया। यहीं से कष्ट चालू होता है। मोर पंख निकालने की बात करेंगे। वाद्य हटाने की बात करेंगे। जो उन्होंने कपड़े पहने नहीं वह पहनाने की बात करेंगे। तो सच्चे अर्थों में तो यह धर्मांतरण वाले हमारी आदिवासी संस्कृति के विरोधी हैं कि जो वह स्वाभाविक रूप से उस आनंद के साथ प्रकृति के साथ जीने का जो हमारा जनजाति समाज का अपना तरीका है ये धर्मांतरण से उस सब पे राष्ट्रांतरण करने की बात करते हैं। और वह हमने उत्तर पूर्व के राज्यों में नॉर्थ ईस्ट में देख लिया है। पूर्वांचल में देख लिया है। तो यह मुझे इस बात की पूरी प्रशासन के साथ हम इस पर सख्ती से भी निपटते हैं और मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि लगातार हम प्रशासन को भी पाबंद कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर जो अपने इस भाव को समझ के सीधे साधे भोलेभाले लोगों को भड़काए नहीं ऐसी कई संस्थाएं काम कर रही गीता गायत्री परिवार है रामकृष्ण कृष्ण मिशन है, सेवा भारती है, वनवासी कल्याण परिषद है, हमारे कमल किशोर नागर जी महाराज साहब है। ऐसे बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के साधु संत और बहुत संगठन अब इस पर काम कर रहे हैं।