ग्वालियरः Gwalior Car Accessories Case: मध्यप्रदेश के ग्वालियर के कंज्यूमर कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वाहन डीलरशिप की मनमानी पर रोक लगाते हुए ग्राहकों के अधिकारों को मजबूती दी है। यह फैसला संगीता गुप्ता द्वारा दायर एक याचिका पर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने प्रेम मोटर्स मारुति शोरूम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
Gwalior Car Accessories Case: मामले के अनुसार, शोरूम द्वारा संगीता गुप्ता पर नई कार खरीदते समय करीब 25 हजार रुपये की अतिरिक्त एसेसरीज लेने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि जब उन्होंने इन एसेसरीज को लेने से इंकार किया, तो शोरूम ने वाहन की डिलीवरी देने से मना कर दिया। इस पर संगीता गुप्ता ने कंज्यूमर कोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने शोरूम की इस कार्रवाई को अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए कड़ी टिप्पणी की।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कोई भी वाहन एजेंसी ग्राहक को एसेसरीज खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, यह उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने प्रेम मोटर्स पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही 5221 रुपये की राशि वापस करने का आदेश दिया है। यह राशि वर्ष 2022 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्वालियर में प्लॉट दिलाने के नाम पर रकम लेने के 13 साल बाद भी रजिस्ट्री और कब्जा न देने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को दोषी ठहराया है। आयोग ने बिल्डर को ग्राहक को 4 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया है। बता दें कि परिवादिनी एकता शर्मा ने साल 2011 में बिल्डर की दो अलग-अलग योजनाओं में कुल 4 लाख रुपए जमा किए थे। उन्हें लंबे समय तक न तो प्लॉट दिया गया और न ही उसकी रजिस्ट्री की गई। बिल्डर ने बाद में रकम वापस करने का आश्वासन दिया था, लेकिन पैसा नहीं लौटाया गया। आयोग ने बिल्डर को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर एकता शर्मा को 4 लाख रुपए की राशि वापस करे। यदि बिल्डर निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं करता है, तो उसे इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।