राहुल गांधी के कार्यक्रम की सुरक्षा शर्तों के दस्तावेज में राजीव गांधी हत्याकांड के जिक्र पर विवाद

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राहुल गांधी के कार्यक्रम की सुरक्षा शर्तों के दस्तावेज में राजीव गांधी हत्याकांड के जिक्र पर विवाद

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  • Publish Date - September 18, 2026 / 04:15 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 04:15 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 18 सितंबर (भाषा) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए पुलिस सुरक्षा शर्तों के दस्तावेज में उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 में हुई हत्या के बाद गठित वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया है।

प्रमुख विपक्षी दल ने इस संदर्भ पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए 2019 में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) सुरक्षा वापस लेने का मुद्दा फिर से उठाया है।

कांग्रेस के मुताबिक पुलिस ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की सुरक्षा शर्तों से जुड़े एक दस्तावेज में वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है,‘‘वर्मा आयोग की रिपोर्ट में इवेंट (कार्यक्रम) आयोजकों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका का बहुत ही गहराई और विस्तार से विश्लेषण किया गया। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में हुई घटना में सुरक्षा व्यवस्था के ध्वस्त होने के पीछे आयोजकों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया सबसे बड़ा कारण था।’’

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती बम विस्फोट में मौत हो गई थी। इस मामले में वर्मा आयोग के गठन का मुख्य मकसद घटना के पीछे की सुरक्षा चूकों की गहन जांच करना था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को दावा किया कि यह पहली बार है, जब पुलिस ने पार्टी के किसी कार्यक्रम की सुरक्षा शर्तों के दस्तावेज में राजीव गांधी हत्याकांड का जिक्र किया है और इससे भाजपा की नीयत पता चलती है।

पटवारी ने संवाददाताओं से कहा,’पहले सरकार ने राहुल गांधी की एसपीजी सुरक्षा छीन ली और अब उनके कार्यक्रम को अनुमति देने के मामले में उनके पिता के हत्याकांड का हवाला दिया जा रहा है।’

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के कार्यक्रम में अड़ंगे डालने के लिए अपनी ताकत का दुरुपयोग कर रही है।

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश सिंह यादव ने यह आरोप खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस इस कार्यक्रम में आने वाले लोगों की तादाद और अन्य बिंदुओं के बारे में पुलिस और प्रशासन को सही जानकारी नहीं दे रही।

यादव ने कहा,’सुरक्षा शर्तों के दस्तावेज में वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला इसलिए दिया गया है ताकि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जा सकें। वरना इस कार्यक्रम में किसी अनहोनी की स्थिति में कांग्रेस सारा दोष तुरंत सरकार पर मढ़ देगी।’

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि राहुल गांधी को ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है और उनके कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर आयोजकों के साथ पुलिस की बैठकें जारी हैं।

उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा शर्तों के दस्तावेज में वर्मा आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख एक संदर्भ के तौर पर किया गया है जिसमें ऐसे कार्यक्रमों में आयोजकों की जिम्मेदारियों से जुड़े बिंदुओं का उल्लेख है।’

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए पुलिस की सुरक्षा शर्तों में शामिल है कि आयोजकों को न्यूनतम 1,500 स्वयंसेवक तैनात करने होंगे जिनमें कम से कम 500 महिलाएं होंगी और आयोजन स्थल पर स्वीकृत क्षमता से अधिक लोगों के जुटने पर प्रवेश रोकने का अधिकार पुलिस के पास रहेगा।

शर्तों में यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम में कोई आपत्तिजनक अथवा उत्तेजक चित्र, बैनर, पोस्टर या होर्डिंग प्रदर्शित नहीं किया जाएगा तथा किसी धर्म, जाति, समुदाय अथवा राजनीतिक या गैर-राजनीतिक संगठन के विरुद्ध ऐसी भड़काऊ या अपमानजनक टिप्पणी नहीं की जाएगी जिससे किसी व्यक्ति की धार्मिक भावना आहत हो।

‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा शुरू किया गया विद्यार्थी-संवाद अभियान है, जिसके जरिये वह प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।

गांधी की अगुवाई में अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के चार संस्करण आयोजित किए गए हैं।

भाषा हर्ष जोहेब

जोहेब