मुंबई, 18 सितंबर (भाषा) डेटा सेंटर, सौर विनिर्माण और प्रौद्योगिकी आधारित कारोबार जैसे नए दौर के उद्योगों के वित्तपोषण में नकदी प्रवाह के आधार पर कर्ज देना आने वाले समय में अधिक महत्वपूर्ण होगा। भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने शुक्रवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि बैंकों को नए ऋण मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है, क्योंकि उभरते व्यवसायों के पास बैंक वित्तपोषण के लिए जरूरी पारंपरिक गिरवी रखने योग्य संपत्ति नहीं हो सकती है।
तिवारी ने बीसीसी एंड आई द्वारा यहां वित्तीय बाजार पर आयोजित सम्मेलन में कहा, ”अगर बैंक दवा और प्रौद्योगिकी जैसे नए कारोबारों को वित्तपोषित करने के तरीके नहीं खोजते हैं, उन्हें केवल भौतिक संपत्ति को जमानत मानकर कर्ज देने की व्यवस्था से आगे बढ़ना होगा।’’
तिवारी ने बताया कि एसबीआई पहले से ही नकदी प्रवाह आधारित ऋण पर विचार कर रहा है और उभरते क्षेत्रों में ऐसे मॉडल लागू कर रहा है।
उन्होंने कहा, ”हम नकदी प्रवाह आधारित ऋण पर भी विचार कर रहे हैं। हम पहले से ही ऐसा कर रहे हैं। हम इसे ‘चक्र’ कहते हैं।”
तिवारी ने कहा, ”यह एक बहुत बड़ा माध्यम है क्योंकि यह प्रौद्योगिकी की दुनिया में तेजी से उभर रहा है…। इनमें डेटा सेंटर, सौर विनिर्माण शृंखला इत्यादि शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि नए जमाने के व्यवसायों को ऋण देने से पहले बैंकों को उनकी प्रौद्योगिकी, राजस्व संभावनाओं, अर्थशास्त्र और नकदी प्रवाह सृजन को समझने की आवश्यकता है।
तिवारी ने कहा, ”सौर ऊर्जा के मामले में जब हमने बारीकियों में जाना शुरू किया तो पाया कि बहुत सारी तकनीक पुरानी पड़ चुकी हैं।”
भाषा पाण्डेय रमण
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