भोपाल। राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बावजूद थानों में पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले एक महीने में तीन थाना प्रभारियों के साथ-साथ आठ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें सस्पेंशन से लेकर लाइन अटैच की कार्रवाई शामिल है। अलग-अलग मामलों में जुआरियों को संरक्षण देने, कार्रवाई में लापरवाही, FIR दर्ज करने में देरी और रिश्वत मांगने जैसे आरोप सामने आए हैं।
कोतवाली थाना प्रभारी प्रभात गौड़ को जुआरियों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया। चौक बाजार में जुए के अड्डे पर ACP कोतवाली संतोष पटेल की दबिश के बाद यह कार्रवाई हुई। मामले में बीट प्रभारी ASI राकेश गुर्जर और आरक्षक नरेंद्र रावत को भी लाइन अटैच किया गया। इससे पहले बजरिया थाना प्रभारी शिल्पा कौरव पर जुआरियों और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगे थे। इसके बाद उन्हें निलंबित किया गया। वहीं अगस्त के आखिरी सप्ताह में कजलीखेड़ा थाना प्रभारी पल्लवी पांडेय को फायरिंग की घटना में FIR दर्ज करने में कथित देरी के चलते लाइन अटैच किया गया। इसी मामले में आरक्षक रवेंद्र तोमर को निलंबित किया गया।
फर्जी IAS तृप्ति सिंह से जुड़े मामले की जांच कर रहे ASI मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर पर भी कार्रवाई हुई। दोनों को लाइन अटैच किया गया। आरोप था कि धोखाधड़ी के शिकार लोगों से ही रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत सामने आने के बाद DCP विकास शहवाल ने कार्रवाई की। लगातार हो रही कार्रवाई को पुलिस विभाग जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत की जा रही कार्रवाई बता रहा है। हालांकि, एक ही महीने में तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से थानों की निगरानी, जवाबदेही और वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।