Dhar Bhojshala Case: क्या हिंदू पक्ष से छिन जाएगा भोजशाला में पूजा का अधिकार..? आधी रात सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई नई SLP, हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती
Dhar Bhojshala Case: इंदौर। धार भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले में एक अन्य मुस्लिम पक्षकार की ओर से इंदौर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई है।
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- मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
- मुस्लिम पक्ष ने दायर की SLP
- हाईकोर्ट आदेश को चुनौती
Dhar Bhojshala Case: इंदौर। धार भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले में एक अन्य मुस्लिम पक्षकार की ओर से इंदौर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई है। यह याचिका 26 मई की रात करीब 11:30 बजे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई, जिसके बाद एक बार फिर भोजशाला विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
जेबरान अंसारी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के नाम से SLP दाखिल
जानकारी के मुताबिक यह याचिका ‘जेबरान अंसारी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ के नाम से दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का डायरी नंबर 33643/2026 दर्ज किया गया है। फिलहाल यह मामला पेंडिंग स्थिति में है और आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि याचिका को स्वीकार किया जाए या नहीं।
बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता ने इंदौर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी है, जो भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद और सर्वे प्रक्रिया से संबंधित है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्षों में लगातार बयानबाजी और कानूनी गतिविधियां तेज हो गई थीं। अब मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचने के बाद इस पर सभी की नजरें टिक गई हैं।
लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद
धार भोजशाला लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। इसी विवाद को लेकर अदालतों में लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है।सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस नई SLP के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। अब अगली तारीख में सुप्रीम कोर्ट यह निर्णय ले सकता है कि याचिका पर विस्तृत सुनवाई होगी या नहीं।
आपको बता दें कि, इससे पहले मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भोजशाला परिसर माँ सरस्वती का मंदिर है और हिंदू पक्ष को यहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी जाती है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है और बीजेपी विधायक रामेश्नेवर शर्मा इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सनातन आस्था की जीत बताया है।
Dhar Bhojshala Verdict: कोर्ट ने ASI सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख किया
कोर्ट ने अपने फैसले में ASI सर्वे रिपोर्ट का भी विस्तार से उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों पर देवी-देवताओं के स्वरूप और धार्मिक आकृतियां स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। इसके अलावा भोजशाला के खंभों पर की गई नक्काशी को राजा भोज के काल का बताया गया, जो मंदिर वास्तुकला और हिंदू संस्कृति की पहचान मानी गई। कोर्ट ने यह भी माना कि परिसर में मौजूद हवन कुंड मंदिर होने का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है।
Bhojshala Temple Controversy: माँ वाग्देवी की प्रतिमा का भी जिक्र किया गया है
ASI सर्वे के दौरान परिसर से कई खंडित देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मिली थीं, जिन्हें अदालत ने अहम साक्ष्य माना। वहीं, फैसले में माँ वाग्देवी की प्रतिमा का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बात पर विचार करने को कहा है कि लंदन म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को वापस भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
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