Jamai Raja Ravana: रावण के ससुराल में आज के दिन धूमधाम से होती है पूजा

Jamai Raja Ravana: रावण के ससुराल में आज के दिन धूमधाम से होती है पूजा, यहां के जमाई है लंकेश, लच्छा बांधने से होती है हर मनोकामना पूरी

Jamai Raja Ravana: रावण के ससुराल में आज के दिन धूमधाम से होती है पूजा, यहां के जमाई है लंकेश, लच्छा बांधने से होती है हर मनोकामना पूरी

Edited By: , November 29, 2022 / 08:53 PM IST

Jamai Raja Ravana: मंदसौर। आज विजया दशमी है असत्य पर सत्य की विजय के इस पर्व पर बुराई के प्रतिक रावन को जगह जगह दहन किया जा रहा है। लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां रावन की पूजा की जाती है और यहां रावण को जमाई का दर्जा दिया जाता है। यहां की महिलाएं जमाई राजा रावण की प्रतिमा के सामने से आज भी पर्दा करके निकलती है। पौराणिक मान्यताओ के अनुसार मध्य प्रदेश के मंदसौर में दशानन रावन का ससुराल स्थित है। यहां रावन की 51 फिट ऊंची विशाल प्रतिमा भी विराजित है, जो काफी प्राचीन है और दशहरे के पर्व पर यहां रावण की पूजा की जाती है। यहां बुराई के प्रतिक रावन का दहन नहीं किया जाता है बल्कि उसे पूजा जाता है।

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धूमधाम से होती है पूजा

Jamai Raja Ravana: दरअसल मान्यता है कि नामदेव समाज के लोग रावण की पत्नी मंदोदरी को अपनी बेटी का दर्जा देते है, इसी लिहाज से मंदसौर में लंकापति रावण को जमाई राजा का दर्जा दिया जाता है। दशहरे के दिन खानपुरा स्थित दशानन की विशाल प्रतिमा को पूजा जाता है। दशहरे के दिन समाज के सभी लोग ढोल धमाको के साथ रावण की पूजा करने पहुंचते है। रावण को फूल हार पहनाए जाते है धूप दीप के साथ आरती कर सभी लोग लंका पति लंकेश रावण की जयकारो साथ ढोल ढमाको से आरती की जाती है इस आरती में समाज के सभी लोगो सहित महिलाए बच्चे बुजुर्ग भी शामिल होते है।

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आदर सम्मान में महिलाएं लेती है घूंघट

Jamai Raja Ravana: ख़ास बात यह है कि मंदसौर के जमाई रावण की प्रतिमा के सामने से आज भी महिलाएं घूंघट करती है। ये मालवा की संस्कृति है जहां जमाई को आदर सम्मान महिलाएं घूंघट डालकर निकला करती है। यहां महिलाएं हमेशा प्रतिमा के सामने से घूंघट करके निकलती है। सदियों से चली आ रही यह परम्परा आज भी वैसी ही प्रचलित है। बताया जाता है की मंदसौर के खानपुरा में स्थित जमाई राजा रावण की यह प्रतिमा काफी प्राचीन है।

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दाएं पैर में बाधा जाता है लच्छा

Jamai Raja Ravana: जीतनी ख़ास जमाई राजा रावण के पुजा की यह परम्परा है उतना ही चमत्कारिक भी है। यहां रावण की पूजा के साथ लोग रावण से मन्नत भी मांगते है और दशानन अपने भक्तों की मन्नत पूरी भी करते है। मान्यता है कि यहां रावण की प्रतिमा है दाए पैर में लच्छा बांधकर मन्नत की जाती है और मन्नतें पूरी भी होती है। यहां लोग दशहरे के पर्व पर रावण की पूजा के साथ सुख समृद्धि की कामना और मन्नत लंकापति रावण से मंगाते है जो पूरी होती है।

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मन्नत होती है पूरी

Jamai Raja Ravana: मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु दशहरे पर पूजा कर चूरमा बाटी का भोग लगाते है। वही मान्यता यह भी है कि बीमार व्यक्ति द्वारा रावण के पैरों में लच्छा बंधने से कई बीमारियां ठीक हो जाती है। इस दिन यहां कई दीन दुखी लोग आते है और रावण के पैरो में लच्छा बांधकर अपने ऊपर आई विपत्तियों को दूर करने के लिए रावण से प्रार्थना करते है। यहां के लोगों का तो यह तक मनना है कि रावन की पूजा करने से मंदसौर में कोई विपप्ती नहीं आती है। नामदेव समाज शहर की सुख समृद्धि की कामना लंकापति से करते है।

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