कुनो से लापता मादा चीता 11 दिन बाद शिवपुरी में मिली, खराब कॉलर बदला गया
कुनो से लापता मादा चीता 11 दिन बाद शिवपुरी में मिली, खराब कॉलर बदला गया
भोपाल, तीन सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में अपने तीन शावकों से अलग होने के बाद लापता हुई मादा चीता निर्वा को 11 दिन की तलाश के बाद पड़ोसी शिवपुरी जिले से सुरक्षित बचा लिया गया और उसका खराब हो चुका सैटेलाइट कॉलर बदल दिया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि छह वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी चीता निर्वा स्वस्थ है और ठीक है।
शिवपुरी, श्योपुर जिले में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान से करीब 35 किलोमीटर दूर है।
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं चीता परियोजना के क्षेत्र निदेशक उत्तम शर्मा ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि निर्वा की तलाश 20 अगस्त से जारी थी। वह अपने शावकों से अलग होने के बाद रेडियो संपर्क क्षेत्र से बाहर चली गई थी, जिससे वन अधिकारियों के लिए उसकी स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया था।
शर्मा ने बताया कि निर्वा का सैटेलाइट कॉलर भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। यह कॉलर 18 फरवरी, 2023 को दक्षिण अफ्रीका से लाए जाने के बाद उसे पहनाया गया था।
उन्होंने कहा कि निर्वा का पता लगाने के लिए रोजाना पांच तलाश दल तैनात किए गए थे, जिनमें 50 से अधिक वनकर्मी, अधिकारी और अनुभवी चीता ट्रैकर शामिल थे।
क्षेत्र के ग्रामीणों को भी निर्वा के बारे में जानकारी दी गई थी और उसकी गतिविधियों से संबंधित सूचना साझा करने को कहा गया था। स्थानीय लोगों से मिली हर सूचना पर तलाश दलों ने तत्काल कार्रवाई की और उसका सत्यापन किया।
अधिकारी ने बताया कि बुधवार को दलों को शिवपुरी जिले के एक गांव के पास चीते की गतिविधि की सूचना मिली। दल तुरंत मौके पर पहुंचे और निर्वा की पहचान करने के बाद उसे सुरक्षित बचा लिया।
उन्होंने बताया कि निर्वा का खराब कॉलर भी बदल दिया गया है।
शर्मा ने कहा, ‘‘निर्वा स्वस्थ है और ठीक है।’’
अधिकारी ने बताया कि भारत में फिलहाल 52 चीते हैं, जिनमें 32 देश में जन्मे हैं। इनमें से 33 चीतों को रेडियो कॉलर लगाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 49 चीते कुनो राष्ट्रीय उद्यान और तीन मंदसौर के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। दोनों अभयारण्यों में कुल 17 चीते फिलहाल जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।
भारत में करीब सात दशक पहले चीते विलुप्त हो गए थे, जिसके बाद देश ने उनकी आबादी को फिर से बढ़ाने के लिए सितंबर 2022 में चीता पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया।
इस परियोजना के तहत सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। तीसरे जत्थे में बोत्सवाना से नौ चीते इस साल 28 फरवरी को भारत पहुंचे थे।
भाषा दिमो मनीषा वैभव
वैभव

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