भोपाल, चार अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पांच अगस्त से प्रतिष्ठित ब्रिक्स देशों के संस्कृति कार्य समूह और संस्कृति मंत्रियों का चार दिवसीय सम्मेलन आरंभ होगा, जिसमें संस्कृति से संबंधित कई विषयों पर चर्चा होगी और सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘यह आयोजन सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देगा एवं ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा। इससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कलात्मक परंपरा तथा सभ्यतागत विरासत प्रदर्शित होगी।’
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री, उपमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
ब्राजील, रूस, इंडिया (भारत), चीन और दक्षिण अफ्रीका के गुट को ब्रिक्स कहा जाता था, लेकिन समय के साथ इसका विस्तार हुआ और अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अन्य देश शामिल है। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।
आठ अगस्त तक होने वाले इस सम्मेलन के दौरान छह और सात अगस्त को दो दिन ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें ब्रिक्स देशों के कलाकार रवींद्र भवन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
अग्रवाल ने बताया कि सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधिमंडल जनजातीय संग्रहालय, राज्य संग्रहालय, वन विहार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का दौरा करेंगे और विश्व धरोहर स्थल सांची और भीमबेटका का भ्रमण करेंगे।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन के पहले दो दिन को अधिकारी स्तर पर नीतिगत प्रारूपों और विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी तथार अगले दो दिन संस्कृति मंत्रियों एवं उप मंत्रियों के स्तर पर विचार-विमर्श कर अंतिम सहमति बनाई जाएगी और फिर घोषणा-पत्र पर सभी देशों की औपचारिक मुहर लगाई जाएगी।
अग्रवाल ने कहा कि भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच निरंतर और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दो प्रमुख दूरगामी प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने एक ‘साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म’ विकसित करने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर कलाकारों की निर्देशिका, रचनात्मक उद्योगों की जानकारी, पांडुलिपियों और स्थापत्य विरासत का एकीकृत दस्तावेजीकरण उपलब्ध रहेगा।
उन्होंने कहा इसके साथ ही भारत ने यूनेस्को में संयुक्त या बहुराष्ट्रीय नामांकनों को बढ़ावा देने की पहल की है।
अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में प्रत्येक देश प्रतिवर्ष केवल एक राष्ट्रीय नामांकन ही भेज सकता है, ऐसे में ‘प्रोजेक्ट मॉनसून’, बौद्ध परंपरा और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जुड़े साझा मंदिर स्थापत्य को अन्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध पाक कला और अनूठे जायके का अनुभव कराने के लिए विशेष व्यंजनों का प्रबंध किया गया है, जिनमें पारंपरिक दाल बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और स्वास्थ्यवर्धक मिलेट्स पर आधारित कोदो व कुटकी शामिल हैं।
अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मेलन भारत की सांस्कृतिक विविधता, सभ्यतागत विरासत, कलात्मक उत्कृष्टता और अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का एक अनूठा अवसर है।
भाषा ब्रजेन्द्र
राजकुमार
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