रास चुनाव में नामांकन खारिज होने के विरूद्ध नटराजन की याचिका पर उच्च न्यायालय ने जारी किए नोटिस

रास चुनाव में नामांकन खारिज होने के विरूद्ध नटराजन की याचिका पर उच्च न्यायालय ने जारी किए नोटिस

रास चुनाव में नामांकन खारिज होने के विरूद्ध नटराजन की याचिका पर उच्च न्यायालय ने जारी किए नोटिस
Modified Date: August 4, 2026 / 08:38 pm IST
Published Date: August 4, 2026 8:38 pm IST

जबलपुर, चार अगस्त (भाषा) कांग्रेस की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज किए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तीनों नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों और निर्वाचन अधिकारी सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति बी. पी. शर्मा की एकलपीठ ने नटराजन की याचिका पर अगली सुनवाई 11 सितम्बर को निर्धारित की है।

नटराजन ने नामांकन खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ 21 जुलाई को उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर की थी।

याचिका में कहा गया है कि न्यायालय में लंबित एक प्रकरण की जानकारी छुपाने को आधार बनाकर निर्वाचन अधिकारी ने नियम को दरकिनार करते हुए नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।

नटराजन की तरफ से याचिका में कहा गया कि एक महिला की तरफ से दायर परिवाद की सुनवाई करते हुए तेलंगाना की एक अदालत ने उनके खिलाफ समन जारी किया था।

इसमें कहा गया है कि परिवाद में उनके खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं है और उन्हें सिर्फ प्रतिवादी बनाये जाने के कारण समन जारी किया गया था।

याचिका में दावा किया गया है कि निर्वाचन अधिकारी ने नियम विरुद्ध तरीके से उनका नामांकन निरस्त किया है।

मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट पर चुनाव में शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में नौ जून को नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था।

इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया था कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फार्म 26 में ‘उक्त न्यायालय परिवाद का उल्लेख नहीं करके अपना शपथ पत्र अपूर्ण प्रस्तुत किया है’।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।

राज्य में राज्यसभा की तीन सीट के चुनाव में से दो पर भाजपा की जीत तय मानी जा रही थी जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी था।

भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा था और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया था। चुनाव में तीनों की जीत हुई थी।

नामांकन निरस्त किये जाने के खिलाफ नटराजन ने निर्वाचन आयोग के समक्ष भी अपील दायर की थी लेकिन राहत नहीं मिलने के कारण उन्होंने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी।

उच्चतम न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ होने के कारण याचिका में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए नटराजन को चुनाव याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी।

इसके बाद नटराजन ने उच्च न्यायालय का रुख किया और चुनाव याचिका दायर की।

शर्मा की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश से निर्वाचित तीनों राज्यसभा सदस्यों चुघ, अग्रवाल और केवट, निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव तथा राज्य निर्वाचन आयोग सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता और आर्यन गुप्ता ने पैरवी की। अब इस चुनाव याचिका पर अगली सुनवाई 11 सितम्बर को होगी।

भाषा सं ब्रजेन्द्र राजकुमार

राजकुमार


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