जबलपुर, 11 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) से शपथपत्र मांगा है। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए पर्याप्त आवास आवश्यक है।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी. पी. शर्मा की खंडपीठ ने जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।
शुक्रवार को जारी विस्तृत आदेश में अदालत ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी सरकारी आवास के बजाय किराये के मकानों में रह रहे हैं।
खंडपीठ ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस संबंध में स्पष्ट शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि राज्य सरकार इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाने का प्रस्ताव कर रही है।
अदालत ने कहा, ‘‘यदि राज्य सरकार जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की सुरक्षा और उनके कल्याण को लेकर गंभीर है तो उसे आवास संबंधी समस्या के समाधान के लिए ठोस योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।’’
खंडपीठ ने कहा कि न्यायाधीशों के लिए आवास और उससे संबंधित बुनियादी ढांचे के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित महसूस कर सकें।
यह जनहित याचिका वर्ष 2016 में तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा मंदसौर में एक न्यायिक अधिकारी से जुड़ी घटना के बाद स्वत: संज्ञान लिए जाने से शुरू हुई थी। इस घटना के बाद जिला न्यायालयों के न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी।
भाषा सं दिमो संतोष
संतोष