इंदौर पेयजल त्रासदी : जांच आयोग की रिपोर्ट अदालत में पेश, इसे सार्वजनिक करने पर बंटे याचिकाकर्ता

इंदौर पेयजल त्रासदी : जांच आयोग की रिपोर्ट अदालत में पेश, इसे सार्वजनिक करने पर बंटे याचिकाकर्ता

इंदौर पेयजल त्रासदी : जांच आयोग की रिपोर्ट अदालत में पेश, इसे सार्वजनिक करने पर बंटे याचिकाकर्ता
Modified Date: August 25, 2026 / 10:33 pm IST
Published Date: August 25, 2026 10:33 pm IST

इंदौर, 25 अगस्त (भाषा) इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत की जांच के लिए गठित आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में पेश कर दी है। मामले के याचिकाकर्ताओं ने मंगलवार को सुनवाई के बाद यह जानकारी दी।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि अदालत ने सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाले एक सदस्यीय आयोग ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के मामले की जांच की है।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ पेयजल त्रासदी को लेकर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

मामले के एक याचिकाकर्ता के वकील अजय बागड़िया ने सुनवाई के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जांच आयोग की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की गई है।

बागड़िया ने बताया कि उन्होंने सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि फिलहाल इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाए और रिपोर्ट अदालत के रजिस्ट्रार कार्यालय में रखी जाए ताकि संबंधित पक्षों के वकील इसे देख सकें।

उन्होंने कहा, ‘‘रिपोर्ट सभी लोगों के लिए उपलब्ध होने पर हर पक्ष अपनी-अपनी सुविधा के मुताबिक उसमें कमियां तलाशेगा और इससे उस मूल मुद्दे से ध्यान भटक सकता है कि भागीरथपुरा के लोगों को दूषित पेयजल की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार आखिर कौन है।’’

इस मामले के एक अन्य याचिकाकर्ता और उच्च न्यायालय के वकील रितेश इनानी ने बताया कि उन्होंने सुनवाई के दौरान अदालत से जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की गुहार की।

भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 के दौरान दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप में कई लोगों की मौत हो गई थी।

स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि दूषित पेयजल के कारण इस इलाके में 36 लोगों की जान गई।

हालांकि, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई और प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।

भाषा

हर्ष रवि कांत


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