Indore UCC News: ‘इस्लाम को UCC से अलग रखो..’, मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने पर मुस्लिम प्रतिनिधियों का विरोध, दे दी ये बड़ी चेतावनी
Indore UCC News: 'इस्लाम को UCC से अलग रखो..', मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने पर मुस्लिम प्रतिनिधियों का विरोध, दे दी ये बड़ी चेतावनी
ucc news/ image source: ibc24 file image
- इंदौर- UCC पर जनपरामर्श बैठक मुस्लिम प्रतिनिधियों का विरोध
- प्रतिनिधियों ने की इस्लाम को UCC से अलग रखने की मांग
- मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि मोइनुद्दीन रज़वी ने रखी मांग
Indore UCC News: इंदौर: इंदौर में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर आयोजित जनपरामर्श बैठक के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने खुलकर अपना विरोध दर्ज कराया। जाल सभागृह में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न समाजों, धार्मिक संगठनों, सामाजिक प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और UCC को लेकर अपने सुझाव रखे। बैठक के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से इंदौर सदर बाजार ईदगाह कमेटी के सदस्य और मुस्लिम स्कॉलर मोइनुद्दीन रज़वी ने UCC को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करते हुए मांग की कि इस्लाम को UCC के दायरे से अलग रखा जाए।
“इस्लाम में पहले से बराबरी का है हक”- रज़वी
उन्होंने कहा कि इस्लाम में पहले से ही बराबरी का अधिकार मौजूद है और मुस्लिम पर्सनल लॉ धार्मिक मान्यताओं और शरीयत के आधार पर संचालित होता है, इसलिए उसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। रज़वी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है और हर समुदाय को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करने की आजादी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि UCC के जरिए मुस्लिम धार्मिक कानूनों में बदलाव करने की कोशिश हुई, तो इसका विरोध किया जाएगा। बैठक के दौरान मुस्लिम प्रतिनिधियों ने अपनी बात बेहद स्पष्ट तरीके से रखते हुए कहा कि सरकार को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे किसी धर्म विशेष की धार्मिक पहचान या परंपराओं पर असर पड़े। इस दौरान मौजूद कई अन्य मुस्लिम प्रतिनिधियों और स्कॉलर्स ने भी इस मुद्दे पर अपनी सहमति जताई और कहा कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप सामाजिक असंतोष को जन्म दे सकता है।
UCC को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस
जनपरामर्श बैठक के दौरान UCC को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। एक ओर कुछ सामाजिक संगठनों और वक्ताओं ने UCC को देश में समानता और एकरूपता लाने वाला कानून बताया, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम प्रतिनिधियों ने इसे धार्मिक अधिकारों में दखल करार दिया। मोइनुद्दीन रज़वी ने कहा कि यदि UCC लागू किया गया और मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव की कोशिश हुई, तो मुस्लिम समुदाय इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगा और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगा। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि UCC लागू होने की स्थिति में मुस्लिम पक्ष कोर्ट जाएगा और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखेगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी विशेष सक्रियता देखने को मिली
इंदौर में आयोजित इस जनसुनवाई में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी विशेष सक्रियता देखने को मिली। बैठक में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सभी प्रतिनिधियों ने विभिन्न समाजों की राय को गंभीरता से सुना और सुझावों को गठित UCC कमेटी तक पहुंचाने की बात कही। बैठक का उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा UCC को लेकर अलग-अलग समाजों की राय जानना और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना बताया गया। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों ने महिलाओं के अधिकार, विवाह, तलाक, संपत्ति और पारिवारिक कानूनों को लेकर अपने-अपने सुझाव दिए। कुछ वक्ताओं ने UCC को महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक समानता के लिए जरूरी बताया, जबकि विरोध करने वाले प्रतिनिधियों ने कहा कि धार्मिक कानूनों में किसी भी प्रकार का बदलाव धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है।
इन्हें भी पढ़ें:-
- Supreme Court Observation: “अगर माता-पिता IAS अधिकारी हैं, तो उनके बच्चों के लिए आरक्षण क्यों?”.. जानें SC ने किस मामले पर की ये सख्त टिप्पणी
- Nitesh Rane Statement: महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे का विवादित बयान.. जानें किसे कहा, ‘ये गवर्मेंट की जमीन है, पाकिस्तान में बैठे तुम्हारे अब्बा का नहीं’..
- Vande Bharat: गौवंश की कुर्बानी.. हुमायूं की बदजुबानी! बकरीद से पहले सातवें आसमान पर सियासी पारा, अदालती आदेशों का पालन कराने में कितना कामयाब होगा प्रशासन?

Facebook


