Intern Doctors Stipend | Photo Credit: IBC24
भोपाल: Intern Doctors Stipend मध्यप्रदेश सरकार ने बुधवार को मेडिकल इंटर्न के मासिक मानदेय में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की घोषणा की। (Intern Doctors Stipend Hike) इसके बाद भोपाल में तीन दिन से आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। सरकार ने सोमवार को प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों पर कथित लाठीचार्ज और पानी की बौछार करने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है।
Intern Doctors Stipend उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंटर्न डॉक्टरों के मासिक मानदेय में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद मानदेय बढ़कर करीब 21 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगा। राजधानी में कमला पार्क चौराहे के पास प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले 14,337 रुपये के मासिक मानदेय को बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग कर रहे थे।
शुक्ल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। आज उनकी प्रमुख मांग स्वीकार कर ली गई है और मानदेय में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गई है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारी मेडिकल इंटर्न के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक बातचीत के बाद समाधान निकला।
उन्होंने बताया कि जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हितेश वाजपेयी ने भी बातचीत में अहम भूमिका निभाई। सोमवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और पानी की बौछार किए जाने के संबंध में शुक्ल ने कहा कि दो पुलिसकर्मियों को सक्रिय ड्यूटी से हटा दिया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इंटर्न डॉक्टरों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई करने वाले दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है।’’ उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ कोई पुलिस मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। भोपाल इकाई के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. अनुराग भाटी ने सरकार के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं, इसलिए वे तीन दिन से चल रहा अपना आंदोलन समाप्त कर रहे हैं।
इस आंदोलन के कारण कीलोल और कमला पार्क के पास मुख्य सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ था। मध्यप्रदेश में मेडिकल इंटर्न अपना मासिक मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार से प्रदर्शन कर रहे थे। वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी आंदोलन का समर्थन किया था। भोपाल के सरकारी गांधी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की थी। इंटर्न डॉक्टरों ने कहा था कि अन्य राज्यों में उनके समकक्षों को करीब 30 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है और वे पिछले तीन वर्षों से अपने मानदेय में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।