केन-बेतवा परियोजना: मां के अनुरोध पर अमित भटनागर ने 18 दिन का अनशन समाप्त किया

केन-बेतवा परियोजना: मां के अनुरोध पर अमित भटनागर ने 18 दिन का अनशन समाप्त किया

केन-बेतवा परियोजना: मां के अनुरोध पर अमित भटनागर ने 18 दिन का अनशन समाप्त किया
Modified Date: July 24, 2026 / 10:36 am IST
Published Date: July 24, 2026 10:36 am IST

छतरपुर (मप्र), 24 जुलाई (भाषा) केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से जुड़े विस्थापन के मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने 18 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया।

भटनागर के भाई अंकित ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब वह अपने गृह नगर बिजावर पहुंचे तो मां के आग्रह पर उन्होंने नारियल पानी पीकर अनशन समाप्त किया।

अंकित ने कहा, ‘‘उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। घर पहुंचने के बाद मां ने उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए मना लिया।’’

छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने बताया कि स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद बृहस्पतिवार को भटनागर को उनके गृह नगर भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद पहले उन्हें बिजावर के सिविल अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था।

पुलिस ने 19 जुलाई को मानसून के दौरान बराना नदी का जलस्तर बढ़ने का हवाला देते हुए कूपी गांव में चल रहे प्रदर्शन को समाप्त करा दिया था। उस समय भटनागर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा था कि उनका अनशन जारी रहेगा।

यह प्रदर्शन तीन जुलाई को बराना नदी पर निर्माणाधीन पुल के नीचे शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास तथा मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच, प्रभावित परिवारों को वैधानिक अधिकार दिए जाने और लंबित मामलों का समाधान करने की मांग कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुनर्वास पैकेज के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने लाभ से वंचित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की।

भटनागर ने दावा किया था कि जिस दिन प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल खाली कराया, उस दिन वह करीब 400 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज मीडिया के सामने रखने की तैयारी कर रहे थे।

अनशन समाप्त होने से पहले आंदोलन में शामिल स्थानीय ‘जय किसान संगठन’ ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भटनागर से उनके परिवार, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को मिलने नहीं दिया गया।

संगठन ने यह भी दावा किया कि आंदोलन के समर्थन में कई गांवों की महिलाओं ने ‘चूल्हा बंद’ आंदोलन शुरू किया।

संगठन के अनुसार, भटनागर ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों और परियोजना प्रभावित परिवारों के संवैधानिक, पर्यावरणीय और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए है।

उन्होंने प्रशासन द्वारा नए सिरे से सर्वेक्षण कराने और संयुक्त जांच दल गठित करने के निर्णय को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि यदि इसे निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से लागू किया गया तो यह आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

कलेक्टर जायसवाल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की अधिकांश शिकायतें पड़ोसी पन्ना जिले के गांवों से संबंधित हैं, जबकि प्रदर्शन छतरपुर जिले में किया जा रहा था।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि छतरपुर जिले से संबंधित कोई शिकायत है तो उसे हमारे समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि प्रभावित लोगों की सूची है तो वह भी प्रशासन को उपलब्ध कराई जा सकती है।’’

उल्लेखनीय है कि 44,605 करोड़ रुपये की लागत वाली केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और जलविद्युत उत्पादन करना है।

भाषा सं दिमो गोला

गोला


लेखक के बारे में